अकाली दल के दूसरे ‘बम’ ने मोदी सरकार को हिलाया ! तोड़ दिया एनडीए से गठबंधन, किसानों के हित में अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ दिया, 1998 से NDA का हिस्सा था अकाली दल, अलग होने से बढ़ी भाजपा की चुनौती..!


  • भाजपा और उसके सबसे पुराने साथियों में शामिल शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच अटूट रिश्ता आखिर टूट गया। इसकी वजह बना किसानों का मुद्दा। कुछ दिन पहले ही अकाली दल ने संसद में लाए गए कृषि संबंधी विधेयकों को लेकर सरकार छोड़ दी थी और अब उसने राजग से अलग होने की घोषणा कर दी है। 

चंडीगढ़। किसान बिल को लेकर  शिरोमणि अकाली दल की ओर से लगातार केंद्र से नाराजगी जताई जा रही थी। वहीं, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता सुखबीर सिंह ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में यह स्पष्ट कर दिया है कि अब उनकी पार्टी  राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा नहीं है। 

सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि यह पार्टी के कई सदस्यों की ओर से निर्णय लिया गया है। अब यह औपचारिक हो चुका है कि गठबंधन टूट चुका है।

अपने इस निर्णय से पहले सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा था। सुखबीर सिंह बादल ने कहा था, ‘द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान को एक एटॉमिक बम (परमाणु बम) से हिला दिया था। अकाली दल के एक बम ने (हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा) प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को हिला दिया है। दो महीनों से कोई भी किसानों पर एक शब्द नहीं बोल रहा था लेकिन अब 5-5 मंत्री इस पर बोल रहे हैं।’

किसानों का प्रदर्शन जारी
पंजाब के अमृतसर में किसान मजदूर संघर्ष समिति की ओर से ‘रेल रोको’ अभियान जारी है। यह विरोध प्रदर्शन किसान बिल के खिलाफ किया जा रहा है। सुखबीर सिंह बादल के इस निर्णय से पहले समिति के महासचिव एसएस पंढेर ने कहा था, ‘अकाली दल स्पष्ट रुख नहीं अपना रहा है। वे अभी भी गठबंधन में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं और राजनीति कर रहे हैं।’

बादल ने लोकसभा में भी किया था विरोध
लोकसभा में सुखबीर सिंह बादल ने साफ कहा था कि शिरोमणि अकाली दल इस किसान बिल का सख्त विरोध करता है। हर बिल, जो देश के लिए हैं, देश के कुछ हिस्से उसे पसंद करते हैं, कुछ हिस्सों में उसका स्वागत नहीं होता है, किसानों को लेकर आए इन तीन बिलों से पंजाब के 20 लाख हमारे किसान प्रभावित होने जा रहे हैं। 30 हजार आढ़तिए, 3 लाख मंडी मजदूर, 20 लाख खेत मजदूर इससे प्रभावित होने जा रहे हैं। अकाली दल के अलावा पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने भी मोदी सरकार की इस बिल को लेकर आलोचना की थी।