पोई भाजी ,छत्तीसगढ़ की प्रिय भाजी. गरीबो का भाजी मे है भरपूर पोषक तत्वों…!



हेल्थ डेस्क, 15 अक्टूबर ।पोई की एक बहुवर्षीय सदाबहार बेल है जिसका एक नाम भारतीय पालक भी है, वैसे तो यह प्राकृतिक रूप से पैदा हो जाती है, परन्तु अब इसे क्यारियों तथा गमलों में उगाया जाने लगा है, पोई भाजी को अन्य देशों में भी खाया जाता है, पोई की दो प्रजातियाँ-एक हरे पत्ते वाली और दूसरी हरे जामुनी पत्तों वाली होती हैं, पोई का तना एवं पत्तियां गूदेदार तथा मुलायम होती है।इसकी कोमल पत्तियों एवं मुलायत टहनियों की भाजी बनाई जाती है, भारत में इसे गरीबों का साग भी कहते हैं, क्योकि यह मुफ्त में उपलब्ध हो जाता है। छत्तीसगढ़ में पोई भाजी बड़े चाव से खाई जाती है,
पोषक तत्वों की दृष्टि से पोई ,पालक से श्रेष्ठ होती है ।
इसकी प्रति 100 ग्राम खाने योग्य पत्तियों में 90.8 ग्राम पानी,2.8 ग्राम प्रोटीन, 0.4 ग्राम वसा,4.2 ग्राम कार्बोहाईड्रेट, 260 मिग्रा. कैल्शियम, 35 ग्राम फॉस्फोरस, 7440 माइक्रोग्राम कैरोटीन, 0.03 मिग्रा.थाइमिन,0.16 मिग्रा. राइबोफ्लेविन, 0.5 मिग्रा.नियासिन एवं 11 मिग्रा.विटामिन ‘सी’ पाई जाती है.इसके पत्तियां हलकी तीखी, मीठी, उत्तेजक, दस्तावर,क्षुधावर्द्धक, गर्मी शांत करने वाला, पित्त रोग, कुष्ठ आदि में उपयोगी पाया गया है।
पोई भाजी हड्डियों-दांतों को मजबूत बनाने के साथ-साथ पेट को स्वस्थ्य रखती है. शरीर में खून बढाती है और रोगों से लड़ने की ताकत देती है ।