रायगढ़ के अंदर भी एक बनारस मिलता है – अनिल पाण्डेय

रायगढ़ और बनारस में कुछ समानताएं हैं जैसे रायगढ़ में कथक का रायगढ़ घराना है तो बनारस में कथक का बनारस घराना है। रायगढ़ भी तबले के साथ संगत के लिए जाना जाता है तो बनारस भी तबले के साथ संगत के लिए जाना जाता है।बनारस अपनी रेशमी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है तो रायगढ़ भी कोसा सिल्क की साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। एक सबसे खास बात कि रायगढ़ भी सत्ता के साथ संगत नहीं करता है तो बनारस भी सत्ता के साथ संगत नहीं करता है ।बनारस को बनारस बनाने में जहां अग्रवालों का भी योगदान है तो रायगढ़ को रायगढ़ बनाने में भी अग्रवालों का योगदान है ।बनारस पवित्र पावनी ,पाप नाशिनी गङ्गा के तट पर बसा है तो रायगढ़ ,रायगढ़ की जीवनदायिनी केलो के तट पर बसा हुआ है ।बनारस में राजघाट और अकथा में 5 हजार साल से लेकर 10 हजार साल पुरानी बसाहट के पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं तो रायगढ़ के कबरा पहाड़ और सिंघनपुर की गुफाओं में 10 हजार साल से लेकर 30 हजार साल पहले आदिमानवों के रहने के पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं।

हिन्दीसाहित्य की बात करें तो बनारस जहाँ भारतेंदु हरिश्चंद्र की नगरी है तो रायगढ़ छायावाद के प्रवर्तक पदम् श्री पंडित मुकुटधर पाण्डेय की नगरी है। संगीत की बात करें तो बनारस में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई गूंजा करती थी तो रायगढ़ में स्व.राजा चक्रधर सिंह के तबले की ताल और थाप गूंजा करती थी ।
इन सारी बातों के बावजूद बनारस और रायगढ़ के बीच कोई तुलना नहीं नहीं की जा सकती है ।रायगढ़ ,रायगढ़ है तो बनारस ,बनारस है लेकिन हम यह कह सकते हैं कि रायगढ़ के अंदर भी एक बनारस मिलता है ।