अंग्रेजों की याद दिलाता…..रायपुर का राजकुमार कॉलेज

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रायपुर.अंग्रेजी शासनकाल काल में देशी रियासतों पर अपनी पकड़ मजबुत बनाने के लिये अंग्रेजों ने तरह तरह के जाल बिछाए…सबसे पहला चोट उन्होंने भारत की देशी शिक्षा प्रणाली को नष्ट कर आने वाली पीढ़ी को मानसिक रूप से गुलाम बनाया। इसी क्रम में एक कालेज का नाम छत्तीसगढ़ में अग्रणी है,जिसका नाम है-राजकुमार कालेज। जैसा की नाम से ही स्पष्ट है, यह कालेज राजेरजवाड़े,जमींदारों की संतानों को अंग्रेजी शिक्षा देकर अपने रंग में रंगने के लिए सन 1894 में नींव रखी गई। यह कालेज पूर्वी भारत का सबसे बेस्ट इंग्लिश मीडियम स्कूलों में गिना जाता था। इस कालेज की स्थापना सर एंड्रू फ्रासेर ने की।

एक झटके में अमीर बना देगी यह करेंसी….!!!!

दरअसल इसे जबलपुर से 1894 में सर एंड्रू ने बोर्डिंग स्कूल के रूप में शिफ्ट किया । जहाँ छत्तीसगढ़,उड़ीसा और बिहार के राजघरानों,जमींदारो के बच्चे पढ़ा करते थे । इस तरह अंग्रेजों ने एक खास रणनीति के तहत आम जनता से अलग एक खास तरह का स्कूल खोल कर आभिजात्य वर्ग को खुश रखा। परन्तु अंग्रेजों की सत्ता हस्तांतरण के बाद इस स्कूल का भारतीयकरण हुआ। इस स्कूल में आज भी शिक्षा के अलावा घुड़सवारी,तीरंदाजी,फोटोग्राफी,योग आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। राजकुमार कालेज CSEB बोर्ड नयी दिल्ली द्वारा मान्यता प्राप्त को-एजुकेशन स्कूल है।

राजकुमार कालेज के मुख्य भवन में एक बड़ी सी घड़ी दिखाई देगी जो लगभग 100 वर्षो से चल रही है। इसे सारंगढ़ रियासत के राजा जवाहिर सिंह ने दिया था। राजकुमार कालेज का एक सन्देश वाक्य भी है-“स्वदेशे पूज्यन्ते राजा..विद्वान् सर्वत्र पूज्यते”