62 देशों ने खोला चीन के खिलाफ मोर्चा…

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दुनियाभर में कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका पर भी लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। डब्ल्यूएचओ पर आरोप है कि उसने इस वायरस को लेकर देरी से चेतावनी जारी की थी। इसके अलावा चीन भी कई देशों के निशाने पर है।
कोरोना वायरस का पहला मामला पिछले साल नवंबर में चीन के वुहान शहर में सामने आया था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातर चीन और डब्ल्यूएचओ पर हमला करते रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि चीन ने कोरोना वायरस को दुनिया में फैलाया है और डब्ल्यूएचओ ने कोरोना की जानकारी छिपाने में उसका साथ दिया।
62 देशों ने खोला चीन के खिलाफ मोर्चा अमेरिका के अलावा जर्मनी, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देश कोरोना वायरस फैलने के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अब इसको लेकर भारत समेत दुनिया के 62 देशों ने चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से सवाल किए हैं। ये सभी देश निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।


सभी देश जानना चाहते हैं इन सवालों के जवाब
कोरोना वायरस आखिर कैसे और किस तरह से इंसानों तक पहुंचा? डब्ल्यूएचओ ने इसकी रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए और उसकी भूमिका क्या रही? दुनिया के करीब 62 देश ऐसे ही सवालों का जवाब मांग रहे हैं। अब भारत ने भी आधिकारिक तौर पर इन देशों को अपना समर्थन देते हुए यूरोपीय यूनियन व ऑस्ट्रेलिया की ओर से जांच की मांग वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत डब्ल्यूएचओ से मांगेगा जवाब
भारत जिनेवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दो दिन के अहम सम्मेलन में हिस्सा ले रहे 62 देशों की उस मांग का समर्थन करेगा जिसमें कोविड-19 संकट की वैश्विक प्रतिक्रिया प्रणाली का निष्पक्ष, स्वतंत्र और समग्र आकलन किए जाने और घातक संक्रमण का पशुजन्य स्रोत का पता लगाने की बात है।
डब्ल्यूएचओ की विश्व स्वास्थ्य सभा (डब्ल्यूएचए) की सोमवार से शुरू हो रही दो दिवसीय 73वीं सभा, वायरस की चीन के शहर वुहान में उत्पत्ति की जांच को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगातार बनाए जा रहे दबाव की पृष्ठभूमि में हो रही है। इस मुद्दे को लेकर चीन और अमेरिका में जुबानी जंग चल रही है।
डब्ल्यूएचओ की बैठक में शामिल नहीं हो पाएगा ताइवान
कोरोना महामारी के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की इस हफ्ते सालाना बैठक होने वाली है। इसमें ताइवान को एक अहम सदस्य के तौर पर शामिल किया जाना था। लेकिन चीन के दवाब के कारण उसे आमंत्रित नहीं किया गया है। इसकी जानकारी ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने दी।
ये देश कर रहे निष्पक्ष जांच का समर्थन
भारत के अलावा इस मसौदा प्रस्ताव को समर्थन देने वालों में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, बेलारूस, भूटान, ब्राजील, कनाडा, चिली, कोलंबिया, जिबूती, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वाडोर, एल सेल्वाडोर, ग्वाटेमाला, गुयाना, आइसलैंड, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, कजाकस्तान, मलयेशिया, मालदीव और मेक्सिको शामिल हैं।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मोंटेनीग्रो, न्यूजीलैंड, उत्तर मैसेदोनिया, नॉर्वे, पराग्वे, पेरु, कतर, कोरिया गणराज्य, मोलदोवा, रूस, सैन मरीनो, सऊदी अरब, ट्यूनीशिया, तुर्की, यूक्रेन, ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड भी इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं।
चीन ने माना, शुरुआती नमूने किए गए नष्ट
न्यूयॉर्क पोस्ट रविवार को में छपी खबर के मुताबिक, चीन ने मान लिया है कि उसने देश में फैले कोरोना वायरस के शुरुआती नमूनों को नष्ट कर दिया था। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के एक सुपरवाइजर लिओ डेंगफेंग ने कहा कि चीनी सरकार ने कोरोनो वायरस सैंपल को अनधिकृत प्रयोगशालाओं में नष्ट करने के लिए तीन जनवरी को एक आदेश जारी किया था
उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एहतियात के तौर पर नूमनों को नष्ट किया गया था। उन्होंने साथ ही कहा कि वायरस को फैलने से रोकने के लिए यह फैसला किया गया था।
चीन पर संक्रमण की जानकारी छिपाने का आरोप
चीन पर संक्रमण के शुरुआती दिनों की जानकारी छिपाने का आरोप है। ताजा घटनाक्रम की बात करें तो वहां कोरोना से जंग में अहम भूमिका निभाने वाले शीर्ष अधिकारी और डॉक्टर झोंग नानशान ने भी खुलासा किया कि स्थानीय अधिकारियों ने कोरोना से जुड़ी प्राथमिक जानकारी को छिपाया था। हालांकि, चीन की सरकार ने जानकारी छिपाने के आरोपों को पहले ही नकार दिया था।
डब्ल्यूएचओ पर चीन की तरफदारी करने का आरोप
कोरोना वायरस फैलने को लेकर डब्ल्यूएचओ और उसके डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस पर चीन का पक्ष लेने का भी आरोप है। इसका मुख्य कारण यह है कि इथोपिया के पूर्व मंत्री साल 2017 में चीन के समर्थन से ही डब्ल्यूएचओ के प्रमुख बने थे।
अमेरिका ने रोकी डब्ल्यूएचओ की फंडिंग
अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को दी जाने वाली फंडिंग को रोक दिया था। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका डब्ल्यूएचओ की फंडिंग को रोक रहा है। ट्रंप ने संगठन पर चीन की तरफदारी करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि कोरोना वायरस के प्रसार का कुप्रबंधन करने और उसकी जानकारी छिपाने में संगठन की भूमिका का आकलन किया जाएगा।
चीन की जनसंपर्क एजेंसी है डब्ल्यूएचओ: ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य निकाय को बीजिंग की जनसंपर्क एजेंसी करार दिया था। ट्रंप ने कहा था, ‘मेरे विचार में विश्व स्वास्थ्य संगठन को खुद पर शर्म आनी चाहिए क्योंकि वह चीन की जनसंपर्क एजेंसी के तौर पर काम कर रहा है।’ ट्रंप प्रशासन कोरोना वायरस के पूरे मामले में डब्ल्यूएचओ की भूमिका की जांच कर रहा है।
आलोचनाओं के बाद भी डब्ल्यूएचओ ने की चीन की सराहना
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आलोचना किए जाने के बाद भी डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए चीन की सराहना की थी। उसने कहा था कि अन्य देशों को वुहान से यह सीखना चाहिए कि वायरस के केंद्रबिंदु पर कैसे सामान्य स्थिति बहाल हुई।
डब्ल्यूएचओ पर गंभीर आरोप
हाल ही में जर्मनी के एक समाचार पत्र ‘डेर स्पीगल’ ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि चीन ने कोरोना वायरस को लेकर डब्ल्यूएचओ को वैश्विक चेतावनी जारी करने में देरी का आग्रह किया था। इस आर्टिकल के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुखिया टेड्रोस एडहैनम को कॉल कर कहा था कि कोरोना को लेकर देर से चेतावनी जारी करें। पत्रिका ने अपनी रिपोर्ट का आधार फेडरल इंटजीलेंस सर्विस से मिली जानकारी को बनाया है।
डब्ल्यूएचओ ने खारिज की रिपोर्ट
जर्मनी के अखबार की इस रिपोर्ट को डब्ल्यूएचओ ने सिरे से खारिज किया है। डब्ल्यूएचओ ने बयान जारी करते हुए कहा है कि ऐसी खबरें भ्रामक हैं जो कोरोना से महामारी से लड़ने में संगठन के मनोबल को कम करती हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से बेबुनियाद और भ्रामक है। बयान में कहा गया है कि 20 जनवरी को ही कोरोना वायरस के इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की खबर दे दी थी।
ताइवान ने पहले ही डब्ल्यूएचओ को कर दिया था आगाह
चीन से निकटता और संबंध होने बावजूद ताइवान ने इस वैश्विक महामारी को फैलने से रोकने में सफलता पाई। उप राष्ट्रपति चेन चिएन-जेन ने कहा कि ताइवान ने 31 दिसंबर को ही डब्ल्यूएचओ को चेतावनी दी थी कि यह वायरस इंसान से इंसान में फैलता है।
चेन ने कहा कि ताइवानी डॉक्टरों ने यह पता लगा लिया था कि वुहान में इस बीमारी का इलाज करने वाले डॉक्टर और दूसरे मेडिकल स्टाफ बीमार पड़ रहे हैं। लेकिन डब्ल्यूएचओ ने इस जानकारी को गंभीरता से नहीं लिया और न ही वक्त रहते इसकी पुष्टि की।
चीन ताइवान को अपना ही एक प्रांत मानता है और सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अलग करने की मांग करता रहा है। जबकि ताइवान खुद को एक अलग लोकतंत्र बताता है जहां साल 1949 में चीन से भागकर आए लोग बस गए थे।