लॉकडाऊन का दर्द/पापा बीमार हुये तो ठेले पर तरबूज बेचने निकले भाई बहन, रोते हुए बोले- “ले लो अंकल हमारे पास खाने को कुछ भी नहीं है”

शाहजहांपुर। 20 मई 2020। देशव्यापी लाॅकडाउन में ऐसे ऐसे दुःखों की कहानी देखनी व सुनने को मिल रही है ना जिसे सुनकर या देखकर हॄदय भर आता है। ऐसे ही कोरोनाकाल में जंग लड़ते हुए आज हम आपको दो ऐसे मासूम भाई-बहनों को दिखाएंगे, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए ठेले पर तरबूज रखकर बेचने के लिए निकल पड़े हैं। ठेले की ऊंचाई के बराबर इन बच्चों की लंबाई है। उसको खींचकर उस पर रखे तरबूजों को बेचता देखकर अफसोस तो ज्यादातर लोगों ने किया। लेकिन उनकी मदद के लिए अभी तक किसी के हाथ आगे नहीं बढ़े नहीं तो हमने देखा है एक से बढ़कर समाज सेवी फोटो खिंचवाते हुए सेवा करते हुए देखे गए हैं। जब बच्चे पूछा कि आखिर वह तरबूज क्यों बेच रहे हैं, तब उनकी आवाज तो नहीं निकली लेकिन आंसू जरूर छलक आए। भाई को रोता देखकर बहन के आंसू भी निकलने वाले थे..लेकिन इन तस्वीरों को देखकर अब उन समाजसेवकों, नेताओं और तमाम मदद करने वालों के दावे अब बेईमानी लगने लगे हैं।

दरअसल, दिल को झकझोर देने वाली ये तस्वीरें शाहजहांपुर के बीचों बीच स्थित अंटा के चौराहे के पास के है। दो मासूम भाई-बहन नंगे पैर फटे हुए कपड़े और गंदी हालत में ठेले को खींच रहे थे। उस ठेले पर तरबूज रखे थे। उन तरबूजों को बेचने के लिए मासूम अपनी मासूमियत भरी निगाहों से ग्राहकों की आस लगा रहे थे। क्योंकि इनके घर में खाना नहीं है। लॉक डाऊन के भारत के हर दुखती रगों को छेड़ा है कोई मर रहा है तो कोई रो रहा है। मजदूरों ने तो पूरी सड़क ही माप डाला है .सरकार के सारे दावे खोखले ही नजर आए हैं। इन जैसे कोई मासूम दिख जाए तो जरूर मदद करना।