रेलमंत्री Vs CM भूपेश: श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को लेकर रेलमंत्री पीयूष गोयल के ट्वीट पर CM भूपेश ने साधा निशाना

नयी दिल्ली 15 मई। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने प्रवासी मजदूरों के मामले में छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों की सरकार पर निशाना साधा तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी पलटवार में वक्त नहीं लगाया। जवाब में भूपेश बघेल ने रेलमंत्री के बयान को आधारहीन और तथ्यहीन बताया है। दरअसल पियुष गोयल ने कुछ देर पहले ट्वीट कर दावा किया था कि प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए 1200 ट्रेन तैयार हैं। परंतु छत्तीसगढ़ कई राज्य सरकारें कम ट्रेनों को अनुमति दे रही हैं। हालांकि इस मामले में उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारों को तारीफ भी की थी। जवाब में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पैसे के भुगतान के बावजूद छत्तीसगढ़ को 30 में से सिर्फ 14 ट्रेनें ही दी गयी।

इससे पहले केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर 1200 ट्रेनें अन्य कामों से हटाकर सिर्फ प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए रिजर्व कर दी गई हैं। जिससे रोज हम 300 ट्रेनें शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन कई ऐसे राज्य हैं जैसे पश्चिम बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड जहां से बहुत ही कम ट्रेनों के लिए परमिशन मिल रही है। वहीं दूसरी ओर उन्होंने इस मामले में दो राज्यों की सरकारों की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार को देखिए जहां क्रमशः अभी तक 400 और 200 ट्रेनें रवाना हो चुकी हैं। ये अपने कामगारों की सुविधा का पूरा ध्यान रख रहे हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा था कि अभी तक उत्तर प्रदेश ने मजदूरों को ले जाने के लिए 386 ट्रेनों की मंजूरी दी है, जबकि बिहार और मध्य प्रदेश ने क्रमश: 204 और 67 ट्रेनों के लिए स्वीकृति दी है। वहीं, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल ने केवल सात-सात ट्रेनों के लिए मंजूरी दी है। इस बयान के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की ओर से 30 ट्रेनों की अनुमति मांगी गई है और हमें अब तक सिर्फ़ 14 मिली हैं।
ट्रेनों के लिए हम क़रीब 1.17 करोड़ का भुगतान भी रेलवे को कर चुके हैं।

रेल मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने 15 दिन से कम समय में 400 ट्रेनों को मंजूरी दी है और अपने प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी कराई है। इस तरह की सक्रियता दिखाने के बजाय पश्चिम बंगाल सरकार और अन्य राज्यों की सरकारें मजदूरों को मदद मिलने से रोक रही हैं।