रायगढ़: अकेली लड़की कोरेंटाइन सेंटर में रहने को मजबूर…रात होते ही लगता है डर…देखें वीडियो

रायगढ़ 15 मई:- पूरे विश्व मे फैले व्यापक बीमारी covid 19 के खतरे को देखते हुए यंहा अन्य राज्य से आए 2 लोगो को ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों द्वारा शासकीय हाई स्कूल में कोरेन्टाइन तो करदिया पर उनका हालचाल पूछने वाला कोई नही।आपको बता दे कि यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ जिला के धर्मजयगढ़ जनपद पंचायत ग्राम कुड़ेकेला का है जंहा 2 लोगो को कोरेन्टाइन किया गया है जिसमे एक लड़की भी है।जब मीडिया द्वारा स्कूल में रह रही लड़की यंहा उषा खलखो पिता सुधीर खलखो से जानना चाही की आपको यंहा खाने पीने रहने की सुविधा मिल रही है तो उनसे बताया कि सोमवार से मुझे शासकीय हाई स्कूल कुड़ेकेला में कोरेन्टाईम किया गया है।

जंहा स्कूल भवन में खाने का व्यस्था पंचायत द्वारा नही किया जब खाने के बारे में पूछा गया तो सरपंच संतराम राठिया द्वारा जवाब दिया गया कि आप खाना का खुद व्यस्था करो हम आपको खाना का राशि भुगतान कर देंगे। फिर जब उषा द्वारा बोला गया कि मैं अकेले लड़की यंहा नही रह सकती किसी का ड्यूटी लगाओ दिन में और रात में तो सरपंच द्वारा जवाब दिया गया कि हम मितानिन का ड्यूटी लगाये है आपको कोई दिक्कत नही होगी लेकिन यंहा तो दिन में एक घंटे के लिए एक मितानिन आती है फिर दिन रात मुझे अकेले रहना पड़ता है , मुझे यंहा बहुत डर लगता है। जिसके वजह से मैं अपने पिताजी को बुलाती हूँ वो 8 किलोमीटर दूर तुमकुड़ा से आते है जो कि हाथी प्रभावित क्षेत्र है वो रोज शाम को 6 बजे मेरे लिए खाने के लिए भोजन और दिनभर के लिए पीने के लिए पानी लाते है और रात को स्कूल के बाहर बने सांस्कृतिक मंच में जागकर रात गुजारते है।फिर सुबह 6 बजे तुमकुड़ा वापस चले जाते हों।

बस सुबह 1 पैकेट बिस्किट ही मुझे पंचायत द्वारा मिलता है खाने को नाम मात्र के लिए। फिर दोपहर को दुबारा मेरे पिताजी भोजन लेकर आते है। मेरे द्वारा बोला गया सरपंच को कि उन्हें स्कूल के अंदर सोने दो क्योंकि यहाँ सुन सान जगह है जंगली जानवर आते है हाथी प्रभावित क्षेत्र भी है तो सरपंच संतराम राठिया द्वारा साफ बोला गया कि नही कोई जरूरत नही इन्हें अंदर सोने की बाहर में ही रहेंगे अंदर नही जाएंगे तो मैं बोली कि ठीक है मेरे पिताजी कल से नही आएंगे आप रात के लिए गार्ड दो या किसी महिला का ड्यूटी लगाव तो उनके द्वारा कोई भी जवाब नही दिया गया।हालांकि अभी स्कूल में 2 ही लोग कोरेन्टाइन है जिसमे दोनों अपने खाने पानी रहने सभी चीज की व्यस्था खुद ही कर रहे है जिससे उन्हें एसा लग रहा है कि वे कोई गुनाह किये है जिसकी सजा उन्हें मिल रही है । मानो पंचायत उन्हें स्कूल में लाकर भूल ही गया है कि वे भी हम जैसे इंसान है।