मोल भाव के बाद हुआ कोरोना मरीज का दाह संस्कार

<- पांच घंटे एबुंलेस चालक ने किया इंतजार

– कोई हाथ लगाने को नहीं था तैयार

पांच घंटे एबुंलेस चालक ने किया इंतजार

– बेबस बेटे ने बिना सुरक्षा किट पहने किया अंतिम संस्कार

– कोई हाथ लगाने को नहीं था तैयार

GORAKHPUR: गोरखपुर में देवरिया के कोरोना पेशेंट की मौत के बाद बडी लापरवाही सामने आई है. देवरिया में क्वारंटीन बेटा अपने पिता की डेडबॉडी लेने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचा जहां उसे डेड बॉडी सौंपकर पल्ला झाड़ लिया गया. जबकि बेटे ने पिता की डेड बॉडी के साथ एंबुलेंस में बैठने के लिए मास्क, ग्लव्स और किट भी मांगे लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मना कर दिया.

इसके बाद राजघाट में पिता की डेडबॉडी गाड़ी से उतरवाने के लिए भी बेटे से पैसे वसूले गए. अंतिम संस्कार करते वक्त एंबुलेंस चालक भी उसे छोड़कर चला गया. इस हाल में युवक दाह संस्कार कर रिक्शे से बस स्टेशन पहुंच गया. जिसकी जानकारी दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने आरएम और प्रशासन को दी. साथ ही उस युवक को भी रिपोर्टर ने इधर-उधर न जाने की सलाह देते हुए एक जगह पर बैठने के लिए कहा. लेकिन लापरवाही का आलम ये कि जिम्मेदारों ने उसे अलग से क्वारंटीन सेंट भिजवाने की जगह भरी बस में ही देवरिया के लिए रवाना कर दिया.

रिपोर्टर और मृतक के बेटे में बातचीत

रिपोर्टर – क्या हुआ आपके साथ?

युवक – मेरे पिता की कोरोना से मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई. इसके बाद डेड बॉडी लेकर पांच घंटे तक एंबुलेंस में राजघाट आकर बैठा हुआ था. किसी ने हेल्प नहीं की.

रिपोर्टर – कब एडमिट किया था?

युवक – पिता दिल्ली मं जर्दा फैक्ट्री में काम करते थे. एक हफ्ता पहले तबीयत खराब हुई तो टेस्ट कराने पर टॉयफायड निकला. डॉक्टर ने बेड रेस्ट की सलाह दी. ख्ख् मई को प्राइवेट गाड़ी से दिल्ली से लेकर आया और मेडिकल कॉलेज में एडमिट करा दिया. उनकी कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो एक दिन पहले मुझे भी क्वारंटीन कर दिया गया.

रिपोर्टर – कब मौत हुई?

युवक – ख्ब् मई की शाम को पिता की मौत की सूचना मिली.

रिपोर्टर – आप कहां थे?

युवक – मैं अपने गांव के बाहर एक प्राइमरी स्कूल में क्वारंटीन था.

रिपोर्टर – आप कैसे पहुंचे मेडिकल कॉलेज?

युवक – देवरिया से सरकारी शव वाहन प्राइमरी स्कूल पर रात क्ख् बजे आया, उसी से मैं गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचा.

रिपोर्टर – राजघाट कब पहुंचे?

युवक – सोमवार भोर में पांच बजे पिता की डेड बॉडी लेकर राजघाट पहुंचा.

रिपोर्टर – राजघाट में कितनी देर डेड बॉडी के साथ थे?

युवक – राजघाट में डेड बॉडी के साथ करीब भ्-म् घंटे तक था. चौकी से लोग आ रहे थे फिर दूर से इशारा करके चले जा रहे थे.

रिपोर्टर – राजघाट में कैसे अंतिम संस्कार किया ?

युवक – चौकी की पुलिस के कहने पर कुछ लोग आए थे लेकिन वे लोग एंबुलेंस से डेड बॉडी उतारने के लिए पैसे की डिमांड कर रहे थे.

रिपोर्टर – कितना पैसा दिया ?

युवक – बिना पैसों के उतारने के लिए तैयार नहीं थे फिर क्ख्00 रुपए दिए तब डेडबॉडी उतारी.

रिपोर्टर – रेलवे बस स्टेशन कैसे पहुंचे?

युवक – एंबुलेंस ले जाने से इनकार कर दिया. पिता की डेडबॉडी जलाने के बाद पैदल निकला. पांच किमी चलने पर एक रिक्शा मिला जिसने रेलवे बस स्टेशन पहुंचाया.

रिपोर्टर – आपकी जांच हुई है?

युवक – पहली जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है. कुछ दिन बाद और जांच भी होगी.

खराब हो गया शव वाहन

रिपोर्टर ने शव वाहन के चालक जयराम से बात की तो उसने बताया कि रात क्ख् बजे से पीपीई किट पहना हुआ हूं. अंदर से सारे कपड़े पसीने के कारण भीग गए हैं. पांच बजे मेडिकल कॉलेज से डेड बॉडी लेकर निकला. डेड बॉडी के साथ एक पुलिस वाहन भी राजघाट तक पहुंचाने के लिए लगाया गया. जैसे-तैसे राजघाट चौकी पर पहुंचा तो दो पुलिस वालों ने राजघाट चलने के लिए कहा. लेकिन कई घंटे इंतजार करने पर भी वे नहीं आए. मैं फिर गाड़ी लेकर चौकी पर पहुंचा तो उन्होंने कहा कि चलो कुछ लोगों को भेज रहे हैं. इस तरह ब्-भ् घंटे केवल मैं इधर-उधर डेडबॉडी लेकर घूमता रहा. इसके बाद मेरी गाड़ी खराब हो गई जिसे खिंचवा कर ले जा रहा हूं. रही बात मृतक के बेटे को ले जाने की तो उसे मैं कैसे ले जाउंगा. मेरे लिए ये रिस्क हो जाएगा.

भरी बस से भेज दिया घर

रिक्शे से बस स्टेशन पहुंचे युवक से रोडवेज अधिकारी तो दूरी बनाते रहे लेकिन उसे भरी बस में बैठाकर देवरिया के लिए रवाना कर दिया गया. इससे पहले भी युवक राजघाट से लगाए बस स्टेशन तक कई जगहों से घूमता हुआ ही बस स्टेशन पर पहुंचा था.

ये हुई लापरवाही

– एक रिपोर्ट निगेटिव आई है. अभी और जांच बाकी है. इसके बाद भी क्ब् दिनों तक युवक को क्वारंटीन रहना था लेकिन वो शहर में घूमता रहा.

– राजघाट में पैसे के लिए घंटों डेड बॉडी उतरवाने के लिए मोलभाव करना पड़ा.

– हर जगह डेड बॉडी जलवाते समय प्रशासन मौजूद रहता है लेकिन यहां कोई नहीं था.

– क्वारंटीन युवक कहीं आ-जा नहीं सकता है. उसे घर पहुंचाने का बंदोबस्त भी प्रशासन ने नहीं किया.

वर्जन

डेड बॉडी पूरी तरह रैप होती है. बॉडी अच्छे से धुलवाई जाती है फिर बैग में रखी जाती है. जो भी बैठा हो उसे कुछ नहीं होगा. ग्लव्स और मास्क पहनकर बॉडी उतारी जा सकती है. एहतियात के साथ दाह संस्कार करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी.

गणेश कुमार, प्रिंसिपल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज

तहसीलदार से बात हुई है. उन्होंने बताया है कि कोरोना पेशेंट के बेटे की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है इसलिए खतरे की कोई बात नहीं है. डेड बॉडी तीन लेयर के अंदर बंद रहती है इसलिए उससे युवक को कोई खतरा नहीं हो सकता है.

डीवी सिंह, आरएम