मजबूर है दूध विक्रेता मजबूर है किसान जिला प्रसाशन की चुप्पी पर सब है हैरान

रायगढ़ 15 मई। वर्तमान में ये परिस्तिथियों की विडंबना ही है कि लोग सड़क पर घूमती गायों की रक्षा के लिये जी जान से लगे है,गायो को गौशाला सुरक्षित पहुंचाने से लेकर चोटिल गायों को चिकित्सालय ले जाने तक,ये कार्य सेवा तो है ही हिन्दू धर्म मे इसे सर्वश्रेष्ट पुण्य भी माना जाता है।
वही किसान परिवार गायों की सेवा जतन अपने परिवार के सदस्य की तरह ही करता है उसके भोजन से लेकर स्वास्थ्य का ख्याल अपने पुत्र की तरह करता है,
गाय भी कलयुग में कामधेनु से कम नही उसके गोबर से लेकर दूध तक उपयोग में लाये जाते है,कई किसानों की जीविका भी गायों से चलती है गायों के दूध का विक्रय करके किसान अपने और अपने परिवार का भरण पोषण करता है।
कोरोना संकट के दौर में जब लाकडाउन में लगा तब से दूध की खपत जीतना उत्पादन होता है उसकी चौथाई
भी खपत किसान नही कर पा रहे क्योकि दूध की सर्वाधिक खपत होटल व्यासाय करने वाले ही करते है व दूध विक्रेताओं का बचा हुआ दूध होटलों के संचालक एक मुश्त क्रय कर लेते है जिससे कि दूध विक्रेताओं के सम्पूर्ण दूध की खपत सहज हो जाती है,
पर एक तरफ जहां प्रशासन लॉक डाउन में नियमों का हवाला देते हुए होटल व चाय की गुमटियां खोलने की अनुमति नही दे रहा है,दूसरी ओर दूध नही खपने से दुग्ध विक्रेता परेशान है. और तरह तरह से प्रदर्शन कर प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रख रहे हैं। आज भी बचे हुए दूध को ग्रामीण विक्रेताओं ने शहर के मध्य सुभाष चौक में
धूप में निकले जरूरतमंद राहगीरों निशुल्क बांट कर प्रदर्शन किया। दूध की खपत नही होने से दूध विक्रेता काफी परेशान हैं।
लॉक डाउन की गाइड लाइन के अनुसार होटल व चाय की गुमटियां खोलने पर प्रतिबंध है. जबकि दूध विक्रेताओं का मानना कहना है कि होटलो में मिठाई बनने व चाय की गुमटियों में उनका अधिकांश दूध खपता है। इनके बन्द रहने से हज़ारों लीटर दूध बच रहा है। दूध की बिक्री नही होने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आलम यह है कि गाय के लिए चारा खरीदने के भी उन्हें लाले पड़ गए हैं और किसानों ने यहां तक कहा है कि कुछ दिन और प्रशासन का रवैय्या ऐसा ही रहा तो मजबूरन उन्हें अपनी गायों को छोड़ना पड़ेगा क्योंकि गायों के चारों के साथ उन्हें अपने घर परिवार के राशन की समस्या भी झेलनी पड़ रही है,यही वजह है कि होटल व चाय की गुमटियां खोलवाने के लिए उन्हें सड़क प्रदर्शन करना पड़ रहा है जिनकी कोई राजनीतिक मंशा राजनैतिक पृष्ठभूमि नही है।
क्योकि जिला प्रशासन की चुप्पी कईयों दूध विक्रेताओं को कर्ज और दिवालिया की और निरन्तर अग्रसर कर रही है जिला प्रशासन को चाहिए कि इन किसान परिवार से सम्बन्धित दूध विक्रेताओं की पीड़ा को समझते हुवे उनकी समस्या का तत्काल निराकरण करें उनके दूध की खपत हो ऐसा बंदोबस्त जिला प्रशासन को करनी चाहिए।