भारत का एक ऐसा पेड़, जिसकी सुरक्षा में 24 घंटे तैनात रहती है पुलिस, सालाना खर्च होते हैं 15 लाख, जानें VIP पेड़ के विषय में.. पढ़े खबर..!

रायसेन। राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री या अन्य नेताओं की सुरक्षा में पुलिस या अन्य सुरक्षा बल तैनात हों, यह तो समझ में आता है, लेकिन किसी पेड़ को 24 घंटे सुरक्षा दी जाए, यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है। लेकिन यह बिल्कुल सच है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और विदिशा के बीच सलामतपुर की पहाड़ी पर एक ऐसा पेड़ है, जिसे किसी वीआईपी नेता की तरह सुरक्षा दी जाती है। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या खास है उस पेड़ में, तो चलिए इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। 

हजारों पेड़ों की हरियाली के बीचों बीच आपको जालियों के बीच जो पेड़ खड़ा नजर आ रहा है दरअसल यह भारत का वीआईपी पेड़ है। इस पेड़ की सुरक्षा में दिन-रात पुलिस के 3 जवान तैनात रहते हैं। पेड़ अगर थोड़ा सा बीमार पड़ जाए तो वनस्पति वैज्ञानिक यहां आते हैं। जी हां आपको जानकर आश्चर्य जरुर हो रहा होगा लेकिन यह भारत का एकमात्र वीआईपी पेड़ है। 21 सितंबर 2012 को श्रीलंका के राष्ट्रपति और जापान के प्रधानमंत्री द्वारा रोपित यह पौधा आज बोधिवृक्ष के नाम से पहचाना जाता है।

करीब 300 ईसा पूर्व पवित्र बोधि पेड़, जिसके नीचे बैठकर गौतम बुद्ध को सत्य की प्राप्ति हुई थी, इसकी एक शाखा को भारत से श्रीलंका ले जाया गया था इसी पेड़ की एक शाखा को सांची यूनिवर्सिटी की आधारशिला आयोजन के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति रहते महिंद्रा राजपक्षे ने रोपा था।

भारत और श्रीलंका के बीच सेतु के रूप में स्थापित विश्व धरोहर सांची से 5 किमी दूर सलामतपुर के पास सांची यूनिवर्सिटी के लिए आरक्षित जमीन पर इसे लगाया गया था। आठ वर्षों से इसकी देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी रायसेन जिला प्रशासन के पास है।

श्रीलंका के अनुराधापुरा में मौजूद बोधिवृक्ष

फरवरी में बीमार हो गया था पेड़

इसी वर्ष फरवरी में वीआईपी पेड़ बीमार हो गया था, मौसम में आए परिवर्तन की वजह से इसमें कीड़े लगने लगे थे। जो इसकी पत्तियों को खा रहे थे। जिसके बाद वनस्पति वैज्ञानिकों ने पेड़ का इलाज किया। जानकारी के मुताबिक इस पेड़ की देखरेख के लिए हर महीने करीब ड़ेढ लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। वहीं गर्मी के मौसम में यहां टैंकर द्वारा पानी जाया जाता है।

माना जाता है कि ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने अपने बेटे महेंद्र और बेटी संघमित्रा को बोधि वृक्ष की एक टहनी देकर बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए श्रीलंका भेजा था। उन्होंने वह बोधि वृक्ष श्रीलंका के अनुराधापुरा में लगाया था, जो आज भी मौजूद है। 

बिहार के बोधगया में मौजूद महाबोधि वृक्ष
बिहार के बोधगया में मौजूद महाबोधि वृक्ष – फोटो : Social media

जिस बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, असल में वह पेड़ बिहार के गया जिले में है। इस पेड़ को कई बार नष्ट करने का भी प्रयास किया गया था, लेकिन यह चमत्कार ही था कि हर बार एक नया वृक्ष उग आता था। हालांकि साल 1876 में यह पेड़ प्राकृतिक आपदा के चलते भी नष्ट हो गया था, जिसके बाद 1880 में अंग्रेज अफसर लॉर्ड कनिंघम ने श्रीलंका के अनुराधापुरम से बोधिवृक्ष की शाखा मंगवा कर उसे बोधगया में फिर से स्थापित कराया था। तब से वह वृक्ष आज भी वहां मौजूद है।