प्राणिक हीलिंग.. “एक वरदान”


लेखक – रमेश अग्रवाल

प्राणिक हीलिंग, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह एक तरह का प्राणायाम है जो प्राण बढ़ने के लिए किया जाता है। यह एक वैज्ञानिक विद्या है जो प्राण ऊर्जा पर आधारित है। प्राण शरीर और इसमें स्थित चक्रों को देख कर रोग का पता लगाया जाता है। इस ऊर्जा से कई प्रकार के रोगों का उपचार किया जाता है। प्राणिक हीलिंग एक वरदान है जिसका उपयोग कर बहुत सी छोटी बड़ी बीमारियों को ठीक करने में किया जाता है। साथ ही यह एक जीवन जीने की कला भी है। योग व् आर्ट ऑफ़ लीविंग से आज हम सब भलीभांति परीचित हैं। प्राणिक हीलिंग को योग की ही एक शाखा के रूप में देखा जा सकता है। जिस प्रकार महर्षि पंतजली द्वारा योग की स्थापना की गई उसी प्रकार मास्टर कोआ सु कोई ने जन जन तक इस ज्ञान को पहुँचाने अपना जीवन लगा दिया। प्राणिक हीलिंग उन्ही के देन है ऐसा कहा जा सकता है। न केवल भारत में अपितु दुनिया के पटल पर प्राणिक हीलिंग अपनी पहचान बना चूका है। इसको सीखने के बाद सर दर्द, पेट दर्द, कब्ज, जलना इत्यादि बहुत सी बीमारियों को घर पर ही ठीक किया जा सकता है, केंसर जैसी लाइलाज बीमारी में भी हीलिंग ने प्रभाव दिखाया है। अभी वर्तमान में कोरोना तक से ठीक होने में प्राणिक हीलिंग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेखक स्वयं इसे अनुभव कर चूका है।

इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि यह एक तरह की चिकित्सा थेरेपी है जिसकी मदद से बिना किसी दवा का इस्तेमाल किये कई तरह के जटिल रोगों का इलाज किया जाता है। प्राणिक हीलिंग के अंतर्गत शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक रोगों तथा इसके अलावा सौंन्दर्य सम्बन्धी रोगों का उपचार संभव है।

मास्टर कोआ सु कोई ने स्पष्ट कर दिया था कि प्राणिक हीलिंग, मेडिकल साइंस का स्थान नहीं लेता अपितु ये ठीक होने की गति को बढ़ा देता है।इसे मेडिकल उपचार का पूरक कहा जाये तो ज्यादा सटीक रहेगा।शारीरिक के अलावा बहुत सी मानसिक बीमारियों में इसके प्रयोग से आशा से अधिक अच्छे परिणाम मिले हैं। हर जीवित प्राणी चाहे वो पेड़ पौधे ही क्यों न हों प्राण होते हैं। प्राण समाप्त तो जीवन समाप्त। ये प्राण ही हमारे शरीर की सभी गतिविधियों जैसे खाना पचना, खून का धमनियों में बहना, हृदय, लीवर किडनी इत्यादी को नियंत्रित करते हैं प्राण में गड़बड़ी आने पर शरीर में तकलीफ आना स्वाभाविक है। हमारे दृश्य शरीर के आलावा भी हमारा एक शरीर और होता है जिसे ओरा या ऊर्जा क्षेत्र कहते हैं। ये ठीक उसी प्रकार होता है जिस प्रकार हमारा शरीर होता है। दृश्य शरीर की प्रतिलिपी होता है। साधारण आँखों से इसे देखा नहीं जा सकता लेकिन किर्लीयन फोटोग्राफी से इसके फोटो लिये गये हैं और अभी भी विज्ञान इस दिशा में आगे काम कर रहा है। हमारे ऋषि मुनी सहज ही औरा को देख लिया करते थे और उपचार भी करते थे। प्राणिक हीलिंग में बहुत ज्यादा दक्ष लोग आज भी इसे देखने में सक्षम हैं। यही नहीं इसके सीखने से साधारण आदमी भी हालांकि देख नहीं सकता लेकिन इसे महसूस जरुर कर सकता है।

प्राण कहाँ से आता है?
ईश्वर प्रदत्त प्राणों के अलावा सूर्य, हवा और पृथ्वी प्राणों के मुख्य स्त्रोत हैं। इनसे प्राण लेकर ही कोई भी प्राणिक हीलर उपचार करता है। शरीर के जिस स्थान पर प्राण कम हैं तो वंहा अतिरिक्त प्राणों की आपूर्ति और यदि ज्यादा हैं तो उसे संतुलित करना। बस यही प्राणिक हीलिंग है। शरीर में व्याधि उसी समय आती है जब किसी अंग में प्राणों की आपूर्ति कम हो या ज्यादा हो जाये। इसे सीखने के लिये किसी विशेष योग्यता की जरूरत नहीं है। कोई भी साधारण इंसान इसे आसानी से सीख सकता है। उम्र का भी कोई बंधन नहीं है। यंहा तक कि व्यक्ति यदि किसी बीमारी से पीड़ित हो तो भी बल्कि उसे तो सीखना ही चाहिये।

नेहा अग्रवाल ( प्राणिक हीलर)

प्राणिक हीलिंग कई बीमारियों को दूर करने में है सहाय

प्राणिक हीलिंग की मदद से डायबिटिज, एन्जाईना, हृदय रोग, गुर्दे की पथरी और विकार, आंतों की सूजन, अल्सर, रक्त स्त्राव, आधे सिर का दर्द, आँखों की कम होती रौशनी, मोतियाबिन्द, बहरापन, सांस का रोग, दमा, पाचन तंत्र के रोग, भूख न लगना, उल्टी, कब्ज व दस्त, पीलिया व लीवर के रोग, गठिया, चर्म रोग, प्रजनन संबंधित रोग , लकवा, गर्दन का दर्द, स्पान्डलाईटिस, हाई ब्लड प्रेशर, गाल ब्लैडर स्टोन, ट्यूमर, फ्रोजन सोल्डर आदि तमाम तरह के विकारों का इलाज संभव है वह भी बिना किसी दवा के। प्राणिक हीलिंग की मदद से मनोविकार, मिर्गी, चिन्ता, उदासी, भय, आत्महत्या की प्रवृति, शराब या किसी अन्य नशे की लत आदि का उपचार संभव है। सिर्फ इतना ही नहीं प्राणिक हीलिंग सौन्दर्य सम्बन्धी विकार भी दूर करता है मोटापे की समस्या, कील-मुहांसे की समस्या, लम्बाई ना बढ़ना, जले-कटे निशानो को मिटाना भी संभव है। मानसिक तनाव व चिंता हमारे आधुनिक समाज की देन है। शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा हो जिसे मानसिक तनाव व् चिंता नहीं होती हो। मानसिक तनाव व चिंता न केवल हमारे सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते ख़राब करते हैं बल्कि इसके प्रभाव शरीर पर पड़ना स्वाभाविक है। दमा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी अनेक बीमारियों के मूल में मानसिक तनाव प्रमुख कारण होता है। प्राणिक हीलिंग हमें इनसे मुक्ति दिला देने में सक्षम है, और हम आज के इस तनावपूर्ण माहोल में भी अपना जीवन ख़ुशी से बिता सकते हैं। खास बात ये भी है कि किसी का इलाज करने के लिये जरुरी नहीं कि वह व्यक्ति सामने ही हो बल्कि दुनिया के किसी भी कोने से और किसी भी कोने तक इलाज किया जा सकता है। स्पर्श की तो इसमें आवश्यकता ही नहीं होती।

रमेश अग्रवाल (प्राणिक हीलर)