रायगढ़ में पीएम व सीएम राहत कोष में दान देने वाले उद्योग संचालक,धन्ना सेठ, व्यापारी व निजी शिक्षण संस्थान आदि लॉकडाउन की अवधि का नहीं कर रहे अपने कर्मचारियों के वेतन का भुगतान

▪️केन्द्र सरकार, राज्य सरकार व जिला प्रशासन का आदेश / निर्देश की तो छोड़ो इंसानियत भी कोई चीज होती है।

हाईलाइट्स:

  • वेतन दिलाने कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर से लगाई गुहार
  • टकटकी लगाए मदद की उम्मीद में कर रहें हैं इंतजार
  • अभी तक नहीं मिली है सेलरी हो रहा है परिवार चलाना मुश्किल
कलेक्टर के पास आवेदन देने गए कर्मचारी

लक्ष्मीकांत दुबे, रायगढ़

रायगढ़ 17 मई। कोरोना वायरस के संक्रमण के रोकथाम व नियत्रंण की दृष्टि से पूरे देश मे लगभग 2 माह से लाक डाउन है । लगभग डेढ माह तो पूर्ण लाँक डाउन रहा किन्तु कुछ दिनों से कई जिलों व राज्य को अपने कारोबार करने के लिये आंशिक छूट भी मिली। हर कोई वर्ग इससे प्रभावित हुआ तथा आर्थिक व्यवस्था  भी बिगड़ी । इस बीच इस आपदा में सहयोग के लिये सभी वर्गों के हाथ उठे। कोई मुख्यमंत्री आपदा कोष , कोई प्रधान मंत्री सहायता कोष , कोई जिला प्रशासन का ,कोई स्वयं अपने स्तर पर सहयोग किया।   इसी बीच इस तरह की घटनाओं को नही नकारा जा सकता कि शहर के कुछ उद्योग संचालक ,सेठ, व्यापारी, निजी शिक्षण संस्थान आदि आदि ऐसे भी हैं जो अपने संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों का लाक डाउन की अवधि का भुगतान नही कर रहे हैं , कुछ आधा कर रहे हैं व कुछ  थोड़ी बहुत जरूरत की वस्तुएँ उपलब्ध करा रहे हैं।   
 

जिला कलेक्टर को 14.05.2020 को दिया गया आवेदन की कॉपी

ऐसा भी नही है कि ये उद्योग संचालक, सेठ, व्यापारी , निजी शिक्षण संस्था के संचालक आर्थिक रूप से मजबूत नही हैं या एक माह का वेतन बिना काम के अपने कर्मचारियों को देने की हालत मे न हो ,लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं जो बिना काम का वेतन ही नही देना चाहते । इसमें काम करने वाले कर्मचारी खुलकर विरोध भी नही कर पा रहे हैं क्यों कि भविष्य मे इन्हें यहीं कार्य करना है अगर ये कर्मचारी शिकायत या विरोध करते हैं तो इसका भी खामियाजा इन कर्मचारियों को भुगतना होगा तथा भविष्य मे कार्य से निकाले जाने का भी डर सता रहा है।

एक, डेढ़ माह का वेतन बिना कार्य के लिये कर देने से इन सक्षम लोगों को तो कोई फर्क नही पड़ेगा किन्तु इन छोटे कर्मचारियों के लिये बहुत फायदे मन्द होगा जो लाक डाउन के कारण प्रभावित हुये है।

ऐसे सामर्थ्य लोग ये भी भूल जाते हैं कि ये वहीं  कर्मचारियों है जो दिन रात मेहनत कर अपने लिये तो थोडा बहुत ही कमाते हैं जिससे परिवार का भरण पोषण व दैनिक जीवन की जरूरतों को पूरा कर सकें किन्तु अपने मालिक के लिये ही ज्यादा कमाते हैं जिसके कारण ये ऐशो आराम की जिन्दगी बिताते हैं और अपने व परिवार के भविष्य के लिये पूंजी बनाते हैं।

इंसानियत उस समय शर्मसार हो जाती है जब ऐसे सामर्थ्य लोग एक माह का वेतन बिना काम के देने के लिये पीछे हट जाते हैं और भूल जाते हैं कि मेरे संस्थान में कार्यरत कर्मचारी मुझ  लपर ही आश्रित है और मेरे लिये ही दिन रात मेहनत करता है साथ ही साथ अखबारों की सुर्खियों के लिये मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री सुहायता कोष मे दान कर वाहवाही लूटते हैं।

लगातार इन कर्मचारी लोगों से सुनने  को मिल रहा है कि इन्हें लाक डाउन अवधि का वेतन नही मिला , आधा मिला या केवल कुछ सहयोग ही मिला। कुछ लोगों ने शिकायतें भी की है जिसमे इंडियन स्कूल के बस चालकों व कर्मचारियों को वेतन लाक डाउन अवधि का न मिलने की शिकायत जिला कलेक्टर महोदय से हुई है और न जाने अन्य शिकायते हुई होगी ।    

बहरहाल जिला प्रशासन को इसका संज्ञान लेते हुये ऐसे कर्मचारियों को तत्काल लाक डाऊन अवधि का वेतन दिलाया जाना चाहिये जिसके संचालक आर्थिक रूप से मजबूत हैं तथा इस संबंध मे  किसी शासकीय अधिकारी को नियुक्त कर शिकायतें दर्ज करने हेतु हेल्प लाईन नम्बर जारी करने की आवश्यकता है ताकि ऐसे मामलों का अविलम्ब निपटारा हो सके व कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी की समस्या उत्पन्न न हो।