टिड्डी दल का छत्तीसगढ़ में भी आक्रमण का खतरा चेतावनी हुआ जारी

अंबिकापुर, 26 मई 2020। देश के कई राज्यों में फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने वाले टिड्डी दल का आक्रमण छतीसगढ़ प्रदेश में भी हो सकता है। कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन केंद्र ने छत्तीसगढ़ राज्य को पहले से ही सतर्क कर दिया है। संचालक कृषि को सूचना देकर टिड्डी दल के आक्रमण से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता जताई गई है।यदि छत्तीसगढ़ में टिड्डी दल का आक्रमण हुआ तो वर्तमान सीजन की फसल पूरी तरह से नष्ट होने की संभावना है। टिड्डी दल द्वारा राजस्थान, गुजरात में बड़े रकबे की खेती को चौपट कर किसानों को तगड़ा झटका दिया गया है। कोरोना संकट की घड़ी में टिड्डी दल से निपटना भी बड़ी चुनौती बनकर भविष्य में सामने आ सकती है।

मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र की सीमा से प्रवेश

भारत सरकार के कृषि और किसान मंत्रालय से सम्बद्ध केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन केंद्र की एक चिट्ठी ने कृषि विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। यह चिठ्ठी टिड्डी दल के छतीसगढ़ में संभावित आक्रमण को लेकर लिखी गई है। अवगत कराया गया है कि राजस्थान से होते हुए टिड्डी दल मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र तक पहुंच चुका है। छतीसगढ़ की सीमाएं दोनों राज्यों से लगी हुई है, इसलिए भविष्य में टिड्डी दल दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों से होते हुए छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर सकता है। इससे बचाव के लिए जानकारी भी प्रेषित की गई है। कीटनाशकों के समय पूर्व उपयोग से टिड्डी दल के आक्रमण से बचा जा सकता है। उत्तरप्रदेश में भी इसका प्रकोप है, लेकिन छत्तीसगढ़ की सीमा से जुड़े उत्तरप्रदेश के जिलों तक यह नहीं पहुंचा है।

आंधी तूफान में भर लेते हैं लंबी उड़ान

मध्यप्रदेश की सीमा सरगुजा संभाग के कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर जिले से लगी हुई है। केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन केंद्र ने मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र की सीमा से टिड्डी दल के प्रदेश में प्रवेश करने की आशंका जताई गई है ऐसा हुआ तो सरगुजा संभाग में निकट भविष्य में इसका असर देखा जा सकता है। संभाग के बड़े रकबे में ग्रीष्मकालीन धान की खेती की गई है। यह फसल एक माह के भीतर पक जाएगी। सब्जीवर्गीय फसलों का भरपूर उत्पादन संभाग के जिलों में हो रहा है ऐसे समय में टिड्डी दल को लेकर सामने आई जानकारी चिंता का विषय है। बताया जा रहा है कि आंधी तूफान चलने पर टिड्डियों का दल एक दिन में लम्बी उड़ान भर लेते हैं। टिड्डियों का बड़ा दल कम समय मे ही बड़े रकबे की फसल को चौपट कर देता है।