छत्तीसगढ़ में कोरोना की जांच में सामने HIV positive …….

छत्तीसगढ़ में कोरोना की जांच में सामने आते नए एचआइवी पॉजिटिव मरीजों के आंकड़ों से चिकित्सा जगत हैरान है। वहीं यहां चलाई जा रही राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण योजना की पोल खुल गई है। दावे यह सिद्घ कर रहे हैं कि व्यवस्था बनाने में लापरवाह स्वास्थ्य विभाग सरकार के महामारी मुक्त राज्य के सपने को पलीता ही लगा रहा है।

दरअसल स्वास्थ्यगत समस्याओं और मिलते-जुलते लक्षणों को देखते हुए कोरोना जांच के लिए अस्पताल पहुंच रहे लोगों के नाक, मुंह का स्वाब और ब्लड सैंपल लिया जाता है। आरटीपीसीआर लैब में नाक के स्वाब सैंपल से कोरोना जांच की जाती है।अन्य बीमारियों और स्थिति को जानने के लिए ब्लड सैंपल लिया जाता है।

इस बीच कई लक्षणरहित संदेही की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद लिए गए ब्लड टेस्ट से उसके एचआइवी पॉजिटिव होने की रिपोर्ट सामने आ रही है। एम्स से मिली जानकारी के अनुसार कोरोना संदेहियों की जांच के दौरान ऐसे लगभग 18 मामले सामने आए हैं। इसमें मार्च में चार, अप्रैल में दो और मई यानी इस महीने के 12 केस हैं।

दोनों में समान मिलते लक्षण

चिकित्सकों ने बताया कि कोरोना में सांस लेने में दिक्कत, सर्दी, खांसी, बुखार, निमोनिया, शरीर में दर्द के लक्षण नजर आते हैं। वहीं एचआइवी में बुखार, सिर दर्द, गले में खराश, पेट में खराबी, बदन दर्द, ग्रंथियों में सूजन जैसे लक्षण नजर आते हैं। दोनों ही बीमारियों के कई लक्षण मिलते-जुलते हैं। तबीयत बिगड़ने के बाद पता ही नहीं चलता कि समस्या क्या है। इसके लिए अस्पताल पहुंचने पर सभी तरह की जांच कराना जरूरी है। इससे ही पता चलता है कि किस बीमारी से मरीज पीड़ित है।

एचआइवी संक्रमित को कोराना संक्रमण का खतरा

चिकित्सकों ने बताया कि एचआइवी संक्रमित व्यक्तियों के शरीर में रोग से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसके चलते उनके शरीर में किसी भी तरह की बीमारियां प्रवेश कर जाती हैं। चूंकि कोरोना संक्रमण बहुत ही संवेदनशील है। यह एचआइवी संक्रमित मरीजों को जल्द ही अपनी जद में ले लेता है। एम्स में मिले ऐसे मरीजों को चिकित्सक काउंसिलिंग कर उन्हें दवा देते हैं। साथ ही जरूरी एहतियात बरतने की हिदायत भी दे रहे हैं।

प्रदेश में एचआइवी पॉजिटिव की संख्या

वर्ष – मरीज

2003 – 37

2004 – 209

2005 – 344

2006 – 639

2007 – 1,119

2008 – 1,508

2009 – 2,184

2010 – 2,287

2011 – 2,563

2012 – 2,910

2013 – 2,838

2014 – 3,146

2015 – 2,894

2016 – 3041

2017 – 3,301

2018 – 2,176

कुल – 31,196

इनका कहना है

प्रदेश में पंजीकृत एचआइवी संक्रमितों को लॉकडाउन होने के बाद भी नियमित दवाएं घर तक पहुंचाई जा रही हैं। वहीं एचआइवी जांच के लिए कार्यक्रम भी चल रहा है। कोरोना की जांच के दौरान यदि नए मरीज मिल रहे हैं तो सभी की जानकारी एकत्रित की जाएगी। जिस अस्पताल में पुष्टि होती है, वहीं से ही मरीजों की दवा शुरू हो जाती है।

डॉ. एसके बिंझवार, राज्य एड्स नियंत्रण कार्यक्रम अधिकारी

एम्स में कोविड-19 की जांच में पहुंचने वाले मरीजों का हम मुंह का लार, नाक का स्वाब और ब्लड सैंपल लेते हैं। नाक और मुंह के सैंपल से कोरोना जांच होती है, जबकि ब्लड सैंपल रिसर्च के लिए रखकर इसकी भी जांच की जाती है। कोरोना जांच को पहुंचने वाले ऐसे संदेही मिले हैं, जिनके टेस्ट के बाद वह एचआइवी का मरीज मिला। ये नए मामले थे। हमने सभी की दवाएं शुरू करा दी हैं। रिकॉर्ड भी स्वास्थ्य विभाग को भेजा जाता है।

डॉ. करन पीपरे, अधीक्षक, एम्स

हमारे यहां कोरोना की जांच के लिए पहुंचने वाले संदेहियों का सिर्फ नाक का स्वाब सैंपल लिया जाता है। ब्लड सैंपल नहीं ले रहे हैं। आंबेडकर अस्पताल में कोरोना की जांच के दौरान एचआइवी पॉजिटिव आने का कोई मामला नहीं है।

डॉ. अरविंद नेरल, विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी, आंबेडकर अस्पताल