कोरोना वायरस : चीन के बाद सबसे ज्यादा पीपीई किट बनाने वाले देशों में दूसरे नंबर पर पहुंचा भारत

नई दिल्ली 26 मई:- पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से हाहाकार मचा हुआ है। भारत भी कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। देश में जारी लॉक डाउन के बाद भी कोरोना वायरस संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। नोवेल कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। देश में अब तक संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 1 लाख 30 हजार को पार कर चुका है और 4 हजार से अधिक लोगों ने जान गंवाई है। इस घातक महामारी से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं। जितनी तेजी से यह महामारी फैल रही है उससे स्वास्थ्य सुविधाओं पर दवाब बढ़ना लाजिमी है। स्वास्थ्य सिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार के प्रयासों का नतीजा अब दिखने लगा है। भारत में जब कोरोना वायरस ने दस्तक दी थी तब पीपीई किट और मास्क की कमी को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। विपक्षी दल इसके लिए सरकार पर हमला बोल रहे थे। देश के अलग-अलग हिस्सों में डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी पीपीई किट और मास्क की कमी की शिकायत कर रहे थे। अब देश इसके लिए आत्मनिर्भर बन गया है। लॉक डाउन के दौरान अब देश में ही जरूरत के मुताबिक पीपीई किट और एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं भारत अब सबसे ज्यादा पीपीई किट बनाने वाले देशों में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।

पीपीई किट बनाने में आत्मनिर्भर भारत :

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट और एन-95 मास्क को लेकर एक जानकारी सार्वजनिक की है। मंत्रालय के मुताबिक इस वक्त देश में रोजाना 3 लाख पीपीई किट और मास्क बनाए जा रहे हैं। अब अपनी जरूरत के मुताबिक देश में ही स्वास्थ्य उपकरणों का उत्पादन होने लगा है। ऐसे में भारत की चीन और अमेरिका जैसे देशों पर निर्भरता खत्म हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भारत में जो पीपीई किट और मास्क बनाए जा रहे हैं उन्हें तय नियमों के मुताबिक पहले जांचा-परखा जाता है। इसके बाद इन्हें उपयोग के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को दिया जाता है। बता दें कि हाल ही में पीपीई किट की क्वालिटी को लेकर चिंता की खबरें सामने आई थीं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने साफ किया कि अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा संगठनों के लिए एचएएल लाइफकेयर एजेंसी मेडिकल उपकरण खरीदती है। पीपीई किट सिर्फ उन्हीं निर्माताओं और सप्लायर से खरीदे जा रहे हैं जिन्हें कपड़ा मंत्रालय की आठ लैब में टेस्ट के बाद मंजूरी मिली है।