आज से संसद के मानसून सत्र शुरू…. कोविड-19 के निर्देशो का कड़ाई से पालन के साथ पूरी होगी सत्र…

नई दिल्ली। 14 सितंबर यानी आज से संसद के मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा इस बार कोरोना महामारी के चलते कई बदलाव किये गए है जो इस मानसून सत्र में दिखाई देंगे. इस बार सत्र के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिये गए सभी गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन होगा कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए कागज का कम से कम इस्तेमाल किए जाने का प्रयास किया जा जयेगा.

सांसद भवन में संसद अपनी अटेंडेंस डिजिटल तरीके से लगाएंगे. सदन में आने वाले सभी लोगों के शरीर के तापमान की जांच के लिए थर्मल गन और थर्मल स्कैनर का इस्तेमाल किया जाएगा. सदन के भीतर 40 जगहों पर टचलेस सैनिटाइटर लगाए जाएंगे और आपातकालीन मेडिकल टीम और एम्बुलेंस की सुविधा सांसद में रहेगी.सत्र शुरू होने से पहले होने वाले सर्वदलीय बैठक को नही करने के आदेश के साथ कोई सर्वदलीय बैठक नहीं होगी. पिछले 20 सालों के मानसून सत्र में ऐसा कभी नहीं हुआ था. कोई भी सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक की एक परंपरा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष “ओम बिरला”और विपक्षी नेताओं के बीच बढ़ती दूरियों के चलते ऐसा नहीं हो पा रहा है.इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ने रविवार को संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक बुलाई थी. सुबह 11 बजे हुई इस बैठक में संसद सत्र के एजेंडा पर चर्चा हुई. बैठक में संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और असदुद्दीन ओवैसी शामिल हुए थे.


संसद सत्र को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस दौरान जानकारी दी कि 257 सांसदों को सदन के मेन हॉल में और 172 सांसदों को विजिटर गैलरी में बैठाया जाएगा.पार्लियामेंट सेशन शुरू होने से पहले स्वास्थ मंत्रालय की ओर से कुछ गाइडलाइन जारी की गई हैं. सुरक्षा के लिहाज से सभी सांसदों का कोविड टेस्ट कराया जा रहा है जिसमें से कल तक 5 सासंदों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है. जी हां, रविवार को जांच में पांच लोकसभा सांसद कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं.संसद के मानसून सत्र से पहले, राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने भी अपना कोरोना परीक्षण करवाया है. उन्होंने खुद इस बात की जानकारी दी है. सभी सांसद सत्र शुरू होने से 72 घंटे पहले अपना टेस्ट करा रहे हैं. मालूम हो कि संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए हर सदस्य कोविड रिपोर्ट निगेटिव आनी जरूरी है.

सत्र के पहले दिन ही लोकसभा में सरकार कुछ अहम बिलों को पेश करना चाहती है. इनमें से कुछ बिलों पर पहले से ही विवाद शुरू हो गया है.इस साल तीन जून को मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए तीन अहम अध्यादेशों को मंज़ूरी दी थी. इनमें दो तो सीधे किसानों और उनके उपज से जुड़ा अध्यादेश था. पहला अध्यादेश कृषि उपज वाणिज्य व व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020 के नाम से जबकि दूसरा अध्यादेश ‘मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020’ के नाम से लाया गया था.उस वक़्त सरकार ने दावा किया था कि ग्राफिक्स इन इसमें ‘वन नेशन वन मार्केट’ की तर्ज़ पर किसानों को अपना उपज किसी भी राज्य में ले जाकर बेचने की आज़ादी होगी. इससे कृषि उपज का बाधा मुक्‍त अंतरराज्यीय व्‍यापार संभव हो सकेगा.

इसका सबसे अहम प्रावधान ये है कि किसानों को अपना उत्पाद राज्य सरकार के कृषि उत्पाद बाज़ार क़ानून के तहत तय की गई मंडी में ही ले जाकर बेचने की बाध्यकता नहीं होगी.किसानों को उनकी फसल का उचित दाम दिलाने के लिए सीधे मिलों, निर्यातकों और खाद्य संस्करण में लगे व्यापारियों के साथ दाम तय करने का अधिकार मिल जाएगा. इससे कृषि उपज के सप्लाई चेन में निजी क्षेत्र की भागीदारी करने का रास्ता खुलेगा.अब नियम के मुताबिक़ इन अध्यादेशों को संसद की मंजूरी के लिए बिल के रूप में कल लोकसभा में पेश किया जाएगा. लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं. कई किसान संगठन भी इनके विरोध में उतर आए हैं.पंजाब और हरियाणा में शुरू हुआ किसानों का विरोध प्रदर्शन अब उत्तर प्रदेश तक भी पहुंच गया है. इन किसान संगठनों का आरोप है की सरकार के इस क़दम से प्राइवेट कंपनियों को किसानों के शोषण का मौक़ा मिलेगा.उनका आरोप है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के ज़रिए उन्हें जो पैसा मिलता है उसपर भी ग्रहण लग सकता है. कांग्रेस ने साफ़ कर दिया है कि पार्टी इन बिलों का विरोध करेगी.इन किसान संगठनों ने कल दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में सोशल डिस्टेंशिंग का पालन करते हुए विरोध प्रदर्शन करने का फ़ैसला किया है. कल ही लोकसभा में सांसदों के वेतन और भत्ते में कई गई कटौती वेल्ला अध्यादेश भी बिल के रूप में पेश किया जाएगा. कोरोना काल में सरकार ने ख़र्च कम करने के उद्देश्य से सांसदों के वेतन और भत्ते में 30 फ़ीसदी की कटौती की थी.

कोविड-19 महामारी के समय में संसद का यह पहला सत्र है। इसलिए, संसदसत्र के दौरान कोविड-19 के दिशा निर्देशों के तहत सुरक्षा के सभी प्रबंधकिए गए हैं।संसद के हर सदन में प्रतिदिन चार घंटे के सत्र होंगे ( राज्य सभा का सत्र सुबहनौ बजे से दोपहर एक बजे तक और लोकसभा का सत्र अपरान्ह तीन बजे सेशाम सात बजे तक) लेकिन सत्र के पहले दिन, 14 सितम्बर को लोकसभा कीबैठक सुबह के सत्र में होगी। सत्र के दौरान संसद सदस्यों की बैठक व्यवस्थामें सुरक्षित दूरी बनाये रखी जाएगी। सदस्य संसद दोनों सदनों के कक्षों और दीर्घाओं में बैठेंगे। सांसदों की उपस्थिति के पंजीकरण के लिए मोबाइल ऐपकी शुरुआत की गई है। संसद सदस्यों की कुर्सियों के बीच पॉली-कार्बन शीटलगाई गयी हैं।

सत्र में शून्य काल के दौरान गैर-तारांकित प्रश्नों को सदन की मेजों पर रखा जाएगा।