आईपीएस संतोष कुमार सिंह कर रहे आम- ओ – खास के साथ अपनों की भी निगेहबानी..जवानों मे तनाव का ईलाज करने मनोचिकित्सकीय परीक्षण की तैयारी..!

रायगढ़ 24 जून। आम तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था मे अधिकारी वर्ग बहुत से दायित्व अपने कर्मचारियों को सौंप कर निश्चिंत हो जाता है। उन्हे मातहत कर्मचारी की विभागीय , व्यवहारिक अथवा निजी दिक्कतों से कोई विशेष सरोकार नहीं होता है। जिसका असर कई बार कर्मचारियों के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन पर इस हद तक पड़ने लगता है कि हीनभावना से ग्रसित कर्मचारी  आत्मघाती कदम तक उठा लेता है।

हांलांकि  हर अधिकारी ऐसा नहीं होता बल्कि कुछ अधिकारी अपने कर्मचारियों के प्रति इस हद तक संवेदनशील होते हैं कि  अपने अधीनस्थों की उलझन अधिकारी को भी बेचैन कर देती है। जिले मे अपने मातहत ड्यूटीरत कर्मचारियों के प्रति ऐसी ही संवेदनशीलता आईपीएस संतोष कुमार सिंह मे देखने को मिली है।पुलिस के चुनौतीपूर्ण दायित्व निर्वहन के दौरान अवसादग्रस्त हो रहे कर्मचारियों की जानकारी ने पुलिस अधीक्षक को इतना व्यथित किया है कि एसपी सिंह जल्द ही जिले भर के पुलिस कर्मियों की मनोचिकित्सकीय जांच कराने की तैयारी कर चुके हैं।

एसपी संतोष कुमार सिंह के मुताबिक इस मनोचिकित्सकीय परीक्षण मे जवानों के निराशा की वजह का पता लगाकर समस्या का यथासंभव निराकरण करते हुये अवसाद से बाहर निकालने की कवायद की जायेगी। दरअसल परित्राणाय साधुनाम का ध्येय वाक्य चरितार्थ करने के दौरान सुरक्षा के अतिमहत्वपूर्ण विभाग की जवाबदारी संभालने वाले पुलिस जवानों के लिए कोई व्यवस्थित समय सारिणी नहीं है।

यही वजह है कि सामान्य परिस्थितियों के अलावा कोरोना महामारी जैसे नाजुक वक्त मे परिवार की चिंता छोड़ समाज के प्रहरी बने वर्दीधारी जवान ड्यूटी को ही प्राथमिकता देते देखे गये हैं। एसपी संतोष कुमार  सिंह के मुताबिक लगातार कठिन परिस्थिति मे ड्यूटी करने से इनका शारिरिक व मानसिक दुष्प्रभाव लाजिमी है और पुलिस विभाग पर काम का दबाव भी अन्य की तुलना मे अधिक होता है।ज्ञात हो कि पूरे कोरोना संकट मे लॉकडाऊन के दौरान संवेदनशील पुलिस कप्तान लगातार जिले भर मे जवानों के बीच पंहुच हौंसला अफजाई करते नजर आये और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आये। देखा जाय तो करीब चार माह के तालाबंदी के वक्त मे पुलिस और प्रशासन अपेक्षा से बढ़कर समर्पण के साथ समाज का कवच बना रहा।

लॉकडाऊन शिथिल होते ही व्यवसायिक गतिविधियां बढ़ने और लोगों की बढ़ती भीड़ ने पुलिस की मुस्तैदी बरकरार रखी है। यही वजह है कि कुछ पुलिस जवानों मे भी कुंठा और अवसादग्रस्त होने की जानकारी एसपी संतोष कुमार सिंह को मिलते ही उन्होंने परिस्थितियों का अध्ययन करते हुये जवानों के मनोचिकित्सकीय जांच की आवश्यकता न केवल महसूस की बल्कि इसकी रुपरेखा भी तय कर ली। वर्दी के पीछे एक सहृदय व्यक्तित्व की मिसाल पेश करते हुये पुलिस जवानों के हितों के लिए फिक्रमंद आईपीएस संतोष कुमार  जवानों की मनोदशा का अध्ययन करने वाले पहले पुलिस अधिकारी हैं जिनकी निगेहबानी  जिले के हर आम ओ-खास के सुरक्षा के साथ अपने मातहत कर्मचारियों के सार्वजनिक जीवन के साथ साथ सामाजिक जीवन पर भी बनी हुई है। एसपी संतोष कुमार सिंह बताते हैं कि मनोचिकित्सकीय जांच से जवानों के मनःस्थिति का पता चल सकेगा और उसके बाद संबंधित जवानों के समस्या का यथासंभव निराकरण कर उसे सकारात्मक विचारों की ओर प्रेरित किया जायेगा ताकि समाज को सुरक्षित रखने वाले खाकी वर्दीधारी जवानों का अपना परिवार और जीवन भी आशंकाओं के स्थान पर उल्लासपूर्ण जीवन का आनंद ले सकें।

उल्लेखनीय है कि अभी कुछ दिन पूर्व ही जिले मे एक आरक्षक के द्वारा आत्महत्या का मामला सामने आया था वहीं एक ट्रैफिक आरक्षक ने भी प्रेमविवाह के बाद अपनी पत्नी की नृशंस हत्या कर दी थी। इसके अलावा प्रदेश के दिगर जिलों से भी जवानों के सपरिवार आत्महत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इन घटनाओं ने न केवल समाज और तंत्र को झकझोरा है बल्कि  प्रशासनिक अमले को भी फिक्रमंद कर दिया है। इसके बावजूद जिले के जवानों का मनोचिकित्सकीय परीक्षण कराने की योजना बनाने वाले आईपीएस संतोष कुमार सिंह प्रदेश के पहले अफसर हैं जिनकी संवेदनशीलता  धरातल पर जाहिर होने के संकेत मिले हैं।