अमेरिकी अखबार का दावा,चीनी राष्ट्रपति के आदेश के बाद हुवा था गलवान घाटी….

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भारत के लद्दाख इलाके में चीन की सेना की हालिया घुसपैठ के कर्ताधर्ता खुद राष्ट्रपति शी चिनफिंग हैं। लेकिन भारतीय सेना ने जिस आक्रामक ढंग से जवाब दिया, उससे चीनी नेतृत्व अचंभित है। 15 जून को गलवन घाटी में हुए हिंसक टकराव में जहां 20 भारतीय सैनिक की जान गई, वहीं जवाबी कार्रवाई में चीन के कम से कम 43 सैनिक मारे गए, यह संख्या 60 भी हो सकती है। भारत के इस अप्रत्याशित जवाब से चीन का कदम फ्लॉप साबित हुआ। चीनी राष्ट्रपति अब भविष्य में अपने देश में पैदा होने वाली चुनौती के मद्देनजर बचाव का रास्ता तलाश रहे हैं।

न्यूजवीक अखबार का सनसनीखेज खुलासा

यह बात अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका न्यूजवीक ने अपने ताजा अंक में कही है। पत्रिका ने लिखा है कि चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे में चिनफिंग के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं। भारतीय सीमा पर चीन की सेना की विफलता पार्टी संगठन में चिनफिंग के लिए भारी पड़ सकती है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का विफल होना चिनफिंग को दुष्परिणाम दे सकता है। पैगोंग सो झील के उत्तरी किनारे पर पीएलए ने घुसपैठ कर अड्डा जमाया, तो उसे जवाब देने के लिए नजदीकी पहाडि़यों पर भारतीय सैनिक ने कब्जा जमा लिया।

भारतीय सैनिकों की चप्‍पे चप्‍पे पर नजर

अब चीनी सैनिकों की सारी गतिविधियां भारतीय सैनिकों की नजरों में हैं। जरा सी गड़बड़ करने पर उन्हें आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। राष्ट्रपति चिनफिंग चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के भी चेयरमैन हैं। इस लिहाज से पीएलए की हर गतिविधि के लिए वह जिम्मेदार हैं। पीएलए कोई कदम उनकी स्वीकृति के बगैर नहीं उठा सकती। इसलिए निश्चित रूप से सेना के सर्वोच्च अधिकारी के रूप में चिनफिंग ने ही भारतीय सीमा के उल्लंघन के लिए हरी झंडी दिखाई है। पत्रिका ने फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के लियो पास्कल के अनुसार गलवन में हुए टकराव में चीन के मारे गए सैनिकों की संख्या 60 तक हो सकती है।

चीनी सेना को मिला मुंहतोड़ जवाब

भारतीय सैनिकों ने जिस मारक क्षमता से चीनी सेना को जवाब दिया, उसकी उम्मीद चीन को नहीं थी। इसी के चलते टकराव में हुए अपने नुकसान के बारे में चीन कुछ नहीं बोल पाया। यह बात चिनफिंग के लिए आने वाले दिनों में भारी पड़ सकती है। चीन की सेना के लिए अचंभित होने का दूसरा मौका तब था, जब सितंबर की शुरुआत में भारतीय सैनिकों ने आसपास की पहाडि़यों की चोटियों पर कब्जा जमा लिया। इससे घाटी में मौजूद सारे चीनी सैनिक उनके निशाने पर आ गए। चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों से पहाडि़यों का कब्जा छुड़ाने की कोशिश भी की लेकिन वे विफल रहे।