अजीत जोगी का रायगढ़ से था गहरा नाता

(अनिल पाण्डेय) रायगढ़ 30 मई। छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी का रायगढ़ जिले से लगभग 33 वर्ष पुराना नाता रहा है ।कांग्रेस की राजनीति में रायगढ़ के लोगों का उनसे परिचय उस ऐतिहासिक खरसिया उपचुनाव के दौरान हुआ था जब अर्जुन सिंह ने यहां से विधानसभा का उपचुनाव लड़ा था । यह भी कहा जाता है कि इस उपचुनाव को जीतने के बाद अर्जुन सिंह सरकार ने जो तेंदूपत्ता नीति घोषित की थी उसके पीछे अजीत जोगी का ही दिमाग था और उसकी सारी रूपरेखा ,योजना अजीत जोगी ने ही बनाई थी।

1991 के अपनी छत्तीसगढ़ की पदयात्रा में अजीत जोगी ने अपने कदमों से पूरे अविभाजित रायगढ़ जिले को नापा था इस दौरान वो रायगढ़ जिले के भूगोल और यहां के लोगों से भी परिचित हुए थे और पूरे जिले में उनकी एक पहचान स्थापित हो गई थी। शायद यही वो एक कारण था जिसने उन्हें रायगढ़ लोकसभा सीट से 1998 में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने को प्रेरित किया था।

रायगढ़ लोकसभा के चुनावी इतिहास में यह चुनाव सबसे अधिक संघर्ष पूर्ण था जिसमें बहुत नजदीकी मुकाबला हुआ था । इस चुनाव में अजीत जोगी और भाजपा के नन्दकुमार साय के बीच कांटे का संघर्ष हुआ था इस चुनाव को जीतने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी तो अजीत जोगी के लिए मध्यप्रदेश से उनके समर्थकों का पूरा हुजूम मय रसद पानी के साथ पहुँचा था।

मतगणना का दौर भी काफी उतार -चढ़ाव भरा हुआ था ,जैसे जैसे मतगणना बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे अजीत जोगी के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही थी ।लैलूंगा विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस को मिल रही बढ़त ने कांग्रेस की जीत की सम्भवनाओं को बरकरार रखा था और अंततः अजीत जोगी रायगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंच गए। पहले चुनाव का कड़ा संघर्ष याद रहने के कारण अजीत जोगी ने रायगढ़ लोकसभा सीट से दूसरा चुनाव नहीं लड़ा था।

छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के बाद राज्य का प्रथम मुख्यमंत्री बनने के बाद अजीत जोगी का रायगढ़ प्रवास हुआ करता था उन्हें रायगढ़ जिले से गहरा लगाव था और वे रायगढ़ के विकास के लिए चिंतित भी रहा करते थे ।केलो बांध की ऊंचाई घटाकर उसके निर्माण की स्वीकृति लेने का अधिकतर कार्य अजीत जोगी के कार्यकाल में ही हुआ था उनके द्वारा बांध निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया गया था ।रायगढ़ में मेडिकल कॉलेज के निर्माण की स्वीकृति भी अजीत जोगी के ही कार्यकाल में दी गई थी ।अजीत जोगी के कार्यकाल में रायगढ़ जिले के ग्रामीण इलाकों में जहां सड़कों का जाल बिछा वही पुल पुलियों का भी निर्माण हुआ था ।
खरसिया उपचुनाव ,रायगढ़ जिले में पदयात्रा , रायगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ने से लेकर अजीत जोगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद और विपक्ष के नेता के रूप में उनकी पत्रकार वार्ताओं में उनसे मेरे द्वारा पूछे गए तीखे सवाल ,उनकी सभाओं का कवरेज को लेकर मेरी स्वयं की कुछ यादें और संस्मरण अजीत जोगी के साथ जुड़े हुए हैं जो कि उनके जाने के साथ ही अब अतीत की यादें बनकर रह गई है ।

वरिष्ठ पत्रकार – अनिल पाण्डेय, रायगढ़ छ. ग.