ग्राम पंचायत रक्सापाली में मनरेगा के तहत कार्य की भुगतान नहीं मिली..! ग्रामीणों ने की सीईओ से शिकायत..! जाने क्या है मामला..!


खरसिया, 03 नवंबर । गांव में विकास कार्य के लिए दी जाने वाली राशि को मनरेगा महात्मा गांधी रोजगार गारंटी के तहत प्रत्येक घरों से एक मजदूर को 100 दिन तक काम देकर भुगतान किया जाता है। उन मजदूरों का मजदूरी का भुगतान बैंक के माध्यम से किया जाता है। उसके लिए पंचायत के रोजगार सहायक प्रति सप्ताह मास्टर रोल और जॉब कार्ड में सभी मजदूरों का नाम हाजरी भरकर जनपद कार्यालय में जमा करते हैं। इसके बाद उन मजदूरों का भुगतान होता है।

शिकायत की कापी

खरसिया के ग्राम पंचायत रक्सापाली के ग्रामीण परेशान है। मनरेगा के तहत कार्य की भुगतान नहीं मिलने से ग्रामीण काफी ज्यादा दुखी व आक्रोशित है।

जाने क्या है मामला..!

खरसिया विकासखंड की ग्राम पंचायत रक्शापाली में महीनों पहले किए गए मनरेगा कार्य का भुगतान आज तक नहीं किया गया है। ऐसे में ग्रामीण पसीना बहाकर भी मजदूरी के लिए परेशान हो रहे हैं। लाकडाउन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत रोजगार दिया गया था वहीं गांव के ग्रामीणों द्वारा मनरेगा के तहत कार्य किया गया..! जिन लोगों ने मनरेगा योजना के तहत कार्य किये है उन लोगों का भुगतान नहीं किया गया बल्कि जो लोग काम नहीं किये है उन्हे पारिश्रमिक दिया गया है। जिन्होंने पसीना बहाकर मनरेगा के तहत गहरी करण कार्य किये उनको अभी तक मेहनत की मजदुरी नहीं मिली है। इस विषय पर ग्रामीणों ने सचिव व रोजगार ग्राम सहायक को बोले तो बोले की उनके खाते में मजदुरी डाल दिया है। लेकिन ग्रामीणों को कहना है कि अभी तक उनके खाते मे पैसा नहीं आया है। इस विषय की जानकारी सीईओ को दिया गया था लेकिन कार्यवाही नहीं की गई।

महिलाओं ने सीईओ से लगाई गुहार..!

खरसिया के ग्राम रक्शापाली की लगभग 30 महिलाओं ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी खरसिया को ज्ञापन सौंपकर अपना मेहनताना मांगा है । यह ग्रामीण महिलाएं लगभग 15 किलोमीटर का सफर ट्रैक्टर से तय कर सीईओ के पास पहुंची। वहीं अपनी ही कारगुजारियों को उजागर होता देख सीईओ आर.डी साहू ने इन महिलाओं को ज्ञापन की पावती भी नहीं दी और उन्हें चलता बना दिया।

बता दें कि नन्हे बच्चों के साथ जनपद मुख्यालय पहुंचीं इन महिलाओं ने अपने ही गांव में लगभग 4 माह पूर्व तालाब गहरीकरण का कार्य मनरेगा के तहत पूरा किया था। पंचायत सचिव रोजगार सहायक एवं सीईओ को मौखिक रूप से कई बार निवेदन करने के बाद भी जब इन्हें मेहताना नहीं मिल पाया तब इन्होंने लिखित में शिकायत की है।

महिलाओं ने ज्ञापन के माध्यम से यह भी कहा है कि जिन लोगों ने गांव में गहरीकरण का कार्य किया ही नहीं उन्हें पारिश्रमिक दे दिया गया, जबकि जिन्होंने मेहनत की वे अब तक वंचित हैं।

अब देखना होगा की ग्रामीणों की गुहार लगाने से उनकी मेहनत की मजदुरी मिलती है या नहीं…?