हाथरस की घटना ने सबको झकझोर दिया, इसको अपनी लेखनी के माध्यम से शब्दों में पिरोया है रायगढ़ के जयलाल कलेत ने…


रायगढ़ 02 अक्टूबर 2020:- उत्तर प्रदेश के हाथरस में जिस प्रकार से पहले चार दरिंदों ने युवती की आबरू को तार तार किया। उससे उन दरिंदों का मन नहीं भरा तो युवती की जिव्हा काट दी, रीढ़ की हड्डी को तोड़ दिया। मानो परिवार के ऊपर एक के बाद एक वज्रपात किया। युवती आखिर कार सिस्टम की लाचारी कहे या नियति का खेल इस दुनिया से रुक्सत हो गई। लेकिन उसे क्या पता था मेरे चले जाने के बाद भी मेरी रूह और तड़पेगी। हुआ भी वही, वारिस होते हुए भी रात के अंधेरे में, बिना परिवार की मर्जी के उसे ओछी सिस्टम ने जलाकर राख कर दिया।

इसी ज्वलंत मुद्दे पर रायगढ़ के उभरते हुए कवि जयलाल कलेत ने अपने कवि मन से एक कविता की रचना की। आप भी पढ़ें उनकी कविता:-

बेइंसाफी

ज़ुल्म सहकर जो दम तोड़ी,
लाशें भी अब न मिल रहे हैं,
तुम्हारी नियत बता रही हैं,
मन में क्या गुल खिल रहे हैं।

तुम्हारे मन में क्या डर है इतनी,
चिताएं रातों रात जल रहे हैं,
वो बिटिया वारिस थी और,
उसे लावारिस जता रहे हैं।

माँ की ममता चीख-चीख कर,
अंतिम दर्शन को तरस रहे हैं,
वाह रे संत तेरी हुकुमत ,
इन्साफ को भी तरसा रहे हैं।

क्या थी तेरी खामियाँ पता है,
सियासी हलचल बता रहे हैं,
माँ भारती की प्यारी बिटिया के,
ज़ख्म चीख कर बता रहे हैं।

तेरी मजबूरी का आलम,
अंधेरी रातें बता रहे हैं,
चिताओं की धधकती लपटों से,
कुर्सियों की चिंता सता रहें हैं।

ज़ुल्म पर ज़ुल्म तो देखो,
दुष्कर्म को भी छुपा रहें हैं,
कानून के रक्षक होकर भी,
अपराधी को ये बचा रहे हैं।

जयलाल कलेत