रायगढ़/ यूं ही नहीं कहते डॉक्टरों को भगवान.. मेडिकल हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला की डॉक्टरों ने रैपचर्ड एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का सफलतापूर्वक इलाज कर महिला को दी नई जिंदगी.. डॉक्टरों ने जीता रायगढ़ का दिल..!


रायगढ़। मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) में एक कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला को गहन चिकित्सा के बाद उसे सुरक्षित बचा लिया गया है। बीती रात 27 वर्षीय महिला को अस्पताल में अत्यंत गंभीर हालत में भर्ती किया गया था, वह दर्द से कराह रही थी, हिमोग्लोबीन का स्तर 5.2 ग्राम और ब्लड प्रेशर भी कम था। करीब 2 घंटे चले ऑपरेशन में महिला के संक्रमित फेलोपियन ट्यूब को काटकर निकाला गया और उसे सुरक्षित बचाया गया।

दरअसल महिला को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (बच्चेदानी के समीप फेलोपियन ट्यूब में ही भ्रूण का बढ़ना) थी और फटने के समीप ( रैपचर्ड) था। वह 2 महीने की गर्भवती थी, जांजगीर की रहने वाली इस महिला को अशर्फी देवी महिला अस्पताल लाया गया जहां कोरोना संक्रमित होने के कारण एमसीएच रेफर कर दिया गया। क्योंकि मातृ एवं शिशु अस्पताल वर्तमान में अभी जिले का कोविड अस्पताल भी बना हुआ है और यहां कोविड-19 संक्रमण के दौरान कई कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं का सफलतापूर्वक प्रसव कराया कराया गया है।

इस महिला का मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर सत्यनारायण पाणिग्रही और उनकी टीम ने इलाज किया। डॉ. पाणिग्रही ने बताया जिस समय महिला को अस्पताल लाया गया था वह बहुत कराह रही थी, उसके शरीर का रंग पीला हो गया था। “हमने तुरंत उसका इलाज शुरू कर दिया। रैपचर्ड एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के समय में ऑपरेशन करना बेहतर विकल्प होता है। करीब दो घंटे तक ऑपरेशन चला। हमनें संक्रमित ट्यूब को काट के अलग कर दिया। यह 7 सेंटीमीटर लंबा और 5 सेंटीमीटर चौड़ा था। साथ ही 700 मिलीलीटर खराब हो चुके खून को भी निकाला।

डॉ. पाणिग्रही बताते हैं कि समय पर महिला को उपचार मिला नहीं तो फेलोपियन ट्यूब फट जाता और यह जानलेवा हो सकता था। इस ऑपरेशन में महिला को एनेस्थीसिया डॉ. लेश पटेल ने दिया,डॉ. पूजा सिंह, सिस्टर सीमा और वार्ड ब्वॉय चंदा राम ने डॉ. पाणिग्रही का सहयोग किया।

क्या है एक्टोपिक प्रेग्नेंसी

मेकाहारा के सीनियर रेजिडेंट डॉ. सत्यनारायण पाणिग्रही बताते हैं कि “फर्टिलाइजेशन से लेकर डिलीवरी तक प्रेग्नेंसी के दौरान कई तरह के शारीरिक बदलाव आते हैं। जब फर्टिलाइजड एग खुद गर्भाशय से जाकर जुड़ जाता है, तब प्रेग्नेंसी शुरू होती है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में फर्टिलाइजड एग गर्भाशय से नहीं जुड़ता है बल्कि वह फैलोपियन ट्यूब, एब्डोमिनल कैविटी या गर्भाशय ग्रीवा से जाकर जुड़ जाता है। इसे अस्थानिक गर्भावस्था भी कहा जाता है। एक निषेचित अंडा गर्भाशय के अलावा कहीं भी ठीक से विकसित नहीं हो सकता है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी 500 में से एक महिला को होती है। यदि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का इलाज न किया जाए तो इसकी वजह से मेडिकल एमरजेंसी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सही उपचार से एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में आने वाली जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है, और भविष्य में स्वस्थ गर्भावस्था की सम्भावना को बढाया और आने वाली स्वास्थ्य समस्यायों को कम किया जा सकता है।”

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्यों होती है

मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के गायनिक विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का सबसे सामान्य प्रकार ट्यूबल प्रेग्नेंसी है जिसमें फर्टिलाइजड एग गर्भाशय तक पहुंचने के रास्ते में ही फंस जाता है। ऐसा अक्सर फैलोपियन ट्यूब के सूजन या किसी अन्य समस्या के कारण क्षतिग्रस्त होने की वजह से होता है। फर्टिलाइजड एग के असामान्य विकास सा हार्मोनल असंतुलन के कारण भी ऐसा हो सकता है। पेल्विक इंफ्लामेट्री डिजीज, धूम्रपान, 35 से अधिक उम्र में प्रेगनेंसी, यौन संक्रमित रोग, पेल्विक सर्जरी के कारण स्कार टिश्यू बनना, पहले एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होना, फर्टिलिटी दवाओं के सेवन और आईवीएफ जैसी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट लेने की वजह से एक्टोपिक प्रेग्नेंसी हो सकती है।