रायगढ़ में प्रदुषण नहीं.. जिला पर्यावरण अधिकारी ने 122 शहरों की सूची का दिया हवाला ! पर्यावरण अधिकारी को क्या रायगढ़ नहीं लगता प्रदूषित ? क्या जीवनदायिनी केलो नहीं लगती काली ?


रायगढ़, 22 नवंबर। आम जनमानस की भावनाओं से खिलवाड़ करते हुये रायगढ़ के पर्यावरण अधिकारी ने कह दिया कि रायगढ़ में प्रदुषण नहीं है। पर्यावरण अधिकारी का बयान इस बात पर आधारित है कि केन्द्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के देश के सर्वाधिक प्रदूषित 122 शहरों की सूची में रायगढ़ का नाम नहीं है। इन शहरों के आंकड़े बोर्ड जारी करता है। इससे ज्यादा बेतुका तर्क और हो ही नही सकता। जिस विभाग ने कभी स्वतंत्र स्टडी नहीं की हो और जो पानी के नमूने भी बाहर की लेब में जांच करवाता हो, उससे ज्यादा उम्मीद भी नहीं की जा सकती। लगभग दो माह पूर्व रायगढ़ कलेक्टर भीम सिंह ने पर्यावरण विभाग को रायगढ़ में कई स्थानों पर प्रदुषण मॉनिटरिंग मशीनें लगाने का आदेश दिया था ताकि सही आंकलन करके उचित कदम उठाये जा सकें।

प्रदुषण का स्तर बयां करते हुए वनस्पति

गोल्डमेन एनवायरमेंट प्राइज विजेता व जनचेतना सदस्य श्री रमेश अग्रवाल ने पर्यावरण अधिकारी से सीधा प्रश्न करते हुए कहा कि :

  • जिला पर्यावरण अधिकारी क्या ये बता सकते हैं कि अपने आला अफसर कलेक्टर के आदेश को भी दरकिनार कर एक भी मॉनीटरिंग केंद्र स्थापित करने में उनकी रूचि क्यों नहीं है ?

  • क्या पर्यावरण अधिकारी एनजीटी द्वारा गठित उस हाई लेवल कमेटी की रिपोर्ट को भी झुटला रहे हैं जिसके अनुसार जिले के घरघोड़ा और तमनार ब्लाक को अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्र मानते हुये एनजीटी ने वहां नये उद्योग या विस्तार पर रोक लगा दी है।

SKS प्लांट के चिमनियों से निकल रहे धुंए को वीडियो में देखिए..  क्या प्रदूषण नहीं फैल रहा है ? ऐसे दर्जनों प्लांट है तो क्या जिला प्रदूषण मुक्त है ?

विदित हो कि रायगढ़ के पर्यावरण अधिकारी स्वयं उस हाईलेवल कमेटी के सदस्य हैं। लगता है पर्यावरण अधिकारी तो देश की पर्यावरण संबंधी मामलों में सर्वोच्च अदालत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के उस आदेश से भी सहमत नहीं होंगें जिसमें रायगढ़ जिले की जीवनदायनी नदी केलो को सर्वाधिक प्रदूषित मानकर इसे साफ करने की जिम्मा पर्यावरण विभाग व रायगढ़ जिला प्रशासन को दिया गया है । लगभग साल भर पहले इस आदेश का पालन रत्ती भर भी हुआ नहीं लगता। केलो नदी आज भी उतनी ही काली है जितनी पहले थी।

फ्लाईएश बिना अनुमति के कहीं भी डंप कर प्रदूषण फैलाया जा रहा है

दरअसल जिन क्षेत्रों में स्वतंत्र स्टडी हुई वहां की वास्तविक हकीकत सामने आ गई। ICMR की तमनार में स्वास्थ्य संबधी रिपोर्ट में खुलासा हो ही गया कि वहां की स्थिति नाजुक है और लोग श्वास संबंधित गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। देश की जानी मानी संस्था नीरी की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि :

“तमनार तहसील के अधिकांश ग्रामों में पानी अत्यधिक प्रदूषित है और पीने लायक तो बिलकुल नहीं है। आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे घातक केमिकल वहां के पानी में अत्यधिक मात्रा में मिलने की पुष्टि इस रिपोर्ट से होती है। केन्द्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड ने जिले के तराईमाल और पूंजीपथरा को अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्र पाया था और वंहा और उद्योग न लगाने की अनुशंसा भी की थी। फिर न मालूम क्यों फिर भी केन्द्रीय बोर्ड ने रायगढ़ को शामिल नहीं किया ?”


इसी बात का नाजायज फायदा उठाते हुये पर्यावरण अधिकारी ने रायगढ़ को प्रदुषण मुक्त घोषित कर दिया। उनको घरों की छत और कमरे की काली सतह नहीं दिखती जो दिन में कई बार पोंछा लगाने के बावजूद काली हो जाती है। लोग छत पर कपड़े सुखाना तो भूल ही गये हैं साथ ही बड़ी बनाना भी क्योंकि उसके लिये धुप में साफ छत का होना जरुरी है। अगर रायगढ़ शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों का स्वतंत्र अध्ययन हो तो हकीकत सामने आ जायेगी लेकिन तब तक न केवल बहुत देर हो चुकी होगी और शायद कोई और रायगढ़ का पर्यावरण अधिकारी होगा।

चिमनियों से निकल रहे धुएं वायुमंडल क्योंकर रहे प्रदूषित

जनचेतना ने जिला प्रशासन से आग्रह करते हुए सहयोग हेतू बढ़ाया हाथ

जिले में प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लेने की बात करते हुए रमेश अग्रवाल ने कहा कि:


“हम जन चेतना के सदस्य रायगढ़ जिला प्रशासन से पुनः आग्रह करते हैं कि यदि वे रायगढ़ के प्रदुषण मामले में वास्तव में गंभीर हैं तो इन अधिकारीयों के भरोसे रहकर गुमराह न हों। जिला खनिज न्यास से फंड की व्यस्था कर एक स्वतंत्र अध्ययन करवायें। हमने पहले भी कई स्टडी करवायी है। किसी भी प्रकार का सहयोग करने में जन चेतना को ख़ुशी होगी ।”

श्री रमेश अग्रवाल

गोल्डमेन एनवायरमेंट प्राइज विजेता व

जन चेतना सदस्य, रायगढ़