मिलनी क्लब काली बाड़ी में गाइडलाइन के साथ दुर्गापूजा


रायगढ़, सत्यजीत घोष। रायगढ़ जिसे कला और संस्कृति की नगरी के नाम से जाना जाता है यहां त्योहारों की भी अपनी एक अलग ही परंपरा है रायगढ़ का जन्माष्टमी मेला रथ यात्रा रामनवमी उत्सव हो या फिर दुर्गा पूजा सभी त्योहारों को मनाने की एक अलग ही परंपरा है साल 2020 के शुरुआत से ही कोरोनावायरस के खतरे के बीच लगभग हर तरह के धार्मिक आयोजनों पर रोक लगी हुई है अब शारदीय कुँवार नवरात्र के आते ही दुर्गा मां की आराधना के दिन याद आ रहे हैं रायगढ़ शहर में विभिन्न स्थानों पर हर वर्ष दुर्गा पूजा का आयोजन होता रहा है भव्य पंडालों में मां दुर्गा की मूर्ति की स्थापना की जाती रही है परंतु इस वर्ष कोरोना के संक्रमण को देखते हुए शासन द्वारा दी गई गाइडलाइन का पालन करते हुए दुर्गा पूजा का आयोजन करना है क्योंकि दुर्गा पूजा बंगाली समाज का एक प्रमुख त्योहार है ऐसे में बंगाली समाज द्वारा प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी कालीबाड़ी में दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है।

इस आयोजन के लिए इस समिति ने जिला प्रशासन से अनुमति ली है समिति के सदस्यों ने बताया कि इस बार कोरोना के संक्रमण की वजह से 5 फीट की दुर्गा मां की प्रतिमा का स्थापना कालीबाड़ी में की जाएगी अन्य मूर्तियां जो पंडाल में रहेंगी उसकी ऊंचाई ढाई फीट से अधिक नहीं होगी शासन की सभी गाइडलाइंस का पालन करते हुए समिति द्वारा इस बार प्रसाद का वितरण नहीं होगा केवल भगवान को ही हल का भोग लगाया जाएगा पंडित के साथ कुल 20 लोगों को पूजा करने की अनुमति जिला प्रशासन द्वारा दी गई है पूजा स्थल पर 4 सीसीटीवी कैमरे भी समिति द्वारा लगाए जाएंगे विसर्जन के लिए भी जिला प्रशासन के दिशा निर्देश के अनुसार छोटी गाड़ियों में ही मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा जिसमें केवल 4 लोग ही सम्मिलित होंगे समिति के लोग पूजा अवधि में इस बात की मॉनिटरिंग करेंगे कि कोई भी व्यक्ति बिना मां के देवी मां के दर्शन के लिए ना पहुंचे सैनिटाइजर रखना पंडाल में आवश्यक होगा 1931 से दुर्गा पूजा का आयोजन कर रही दुर्गा पूजा समिति का यह 89 वां साल है, हर वर्ष धूमधाम से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता रहा है परंतु इस वर्ष समिति ने सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को वर्चुअल कराने का निर्णय लिया है पंडाल में स्थापित होने वाली मूर्ति सरायपाली से बनकर आएगी क्योंकि आज पास कोई बंगाली मूर्तिकार नहीं है इस वजह से सरायपाली से मूर्ति का निर्माण करवाया जा रहा है।

बंगाली समाज ने बताया कि परंपरा अनुसार इस वर्ष भी दुर्गा पूजा पूरी श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी और इस बात की प्रार्थना की जाएगी की करोना के संक्रमण से देशवासी सुरक्षित रहें और जल्द से जल्द हम इस भयंकर महामारी पर विजय प्राप्त कर सकें।