नशाखोरी को लेकर ओपी चौधरी की चिंता प्रदेश के लिए शराब बन्दी का मार्ग प्रशस्त करेगी..भाजपा हो या कांग्रेस शराब में सत्ता का चरित्र नहीं बदला..!

  • नशा खोरी को लेकर ओपी की एक पोस्ट पर 18k लाइक्स 2.8k कमेंट्स 564 शेयर्स

रायगढ़ 29 जून। सड़क दुर्घटनाओं की असल वजह नशाखोरी है छग सियासत में भाजपा की राजनीति के महानायक ओपी चौधरी जब राह चलते दुर्घटना ग्रस्त वाहन सवार को देखते है तो बढ़ती हुई नशाखोरी की वजह से दुर्घटनाये उन्हें विचलित करती है उनकी वाजिब चिंता जब सोशल मीडिया में वायरल होती है । प्रदेश भर के 18k लाइक्स 2.8 कमेंट्स 564 शेयर करने वाले लोग इस ओपी की नशा खोरी की चिंता से मेरी तरह इत्तेफाक रखते है। दरअसल ओपी को प्रदेश के लोग एक भरोसे के रूप में देखने लगे है। जनता को यह विश्वास है कि बयांग की माटी में जन्मा यह युवा कलेक्टरी छोड़ कर राजनीति से परे हटकर कुछ नया करने आया है।

शराब के नशे व सत्ता के नशे में बहुत ज्यादा अंतर नही है। शराब चढ़े तो आसमान…उतरे तो धरती नज़र आती है l सत्ता की खुमारी भी शराब जैसी ही है। रमन राज में शराब बेचने वाली भाजपा आज कांग्रेस को शराब बंदी का वादा याद दिला रही है।

दरअसल शराब सरकारों के लिए कमाऊ पूत है जिसकी बुराई सरकारो को कभी नही दिखती एक बाप के लिए बिगड़ा हुआ कमाऊ बेटा अच्छा है। बतौर विपक्ष काँग्रेस भी शराब को लेकर भाजपा पर हमलावर रही सत्ता का चरित्र नही बदलता आज भाजपा कांग्रेस पर हमलावर है। लॉक डाउन की वजह से पियक्कड़ों का गला नही सूखा बल्कि कमाई बन्द होते देख सरकारों का गला अवश्य सूखने लगा । कोरोना को संक्रमण से फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेंन्स सबसे आवश्यक था इसकी अनदेखी करते हुए सरकार ने कमाऊ पूत को अपनी दुकान खोलने की सहर्ष अनुमति दे दी।

चाहे ताली बजवाने वाली सरकार हो…या दीपक जलवाने वाली सरकार हो…..गंगा जल उठाकर शराब बंदी की घोषणा करने वाली सरकार हो..सबने यह साबित कर दिया कि बिगड़ैल कमाऊ पूत शराब की कमाई का मोह नही छोड़ेंगे….

दिल्ली की सरकार के लिए यह स्वर्णिम अवसर था । धारा 370 को हटा कर भाजपा ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को एक बनाया उसी तरह देश में शराब बंदी का मार्ग प्रशस्त कर इस लोकतंत्र में नया इतिहास बनाया जाता। मेरी तरह बहुत से लोग ओपी से इसलिए इत्तेफाक नही रखते कि वे छग भाजपा के सारथी बन रहे है बल्कि इसलिए उन पर भरोसा करते है कि ओपी छग में सामाजिक बदलाव के ध्वज वाहक बनेंगे l शराबबंदी के मामला उनमें से एक है। ओपी यह भली भाँति जानते है कि छग की उर्वरा माटी मानसून के भरोसे है वे खेती के उन्नत तरीके बताकर प्रदेश की जनता के माथे से परेशानी के बल सदा के लिए दूर करना चाहते है।

क्या ओपी की चिंता भविष्य में प्रदेश में शराब बंदी की राह प्रशस्त करेगी इस दावे को समझने के पहले छग के बिगड़ैल कमाऊ पूत शराब की सच्चाई भी जान ले :-

👉🏻 राष्ट्रीय वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण की मानें तो छत्तीसगढ़ के 100 में से 32 लोग शराब पीने के आदी हैं, जो देश में सर्वाधिक है।

👉🏻 महाराष्ट्र की आबादी 11.47 करोड़ है, जबकि शराब से कमाई 10546 करोड़ रुपए है. वहीं, छत्तीसगढ़ की आबादी 2.55 करोड़ है, यहां शराब से कमाई लगभग 4700 करोड़ रुपए है. इस कमाई को आबादी से भाग दें तो छत्तीसगढ़ में शराब की खपत प्रति व्यक्ति 1843 रुपए की है. महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 919 रुपए प्रति व्यक्ति है।

  • पियक्कड़ों ने देश मे किया छग का नाम रोशन छत्तीसगढ़ के बाद सबसे ज्यादा शराब त्रिपुरा, पंजाब, अरूणाचल प्रदेश और गोवा में पी जाती है।

  • शायद भाजपा को अपनी यह उपलब्धि न मालूम हो कि सस्ते चावल ने जनता को शराबी बनाने में अहम भूमिका निभाई है रमन राज में जनवरी 2008 में गरीबों को तीन रुपये में 35 किलो चावल दिये जाने की योजना शुरू होने के बाद से राज्य में शराब की बिक्री में आश्चर्यजनक रूप से तेज़ी आई है।

  • 2008-09 ने कमाऊ पूत ने कमाए 965.05 करोड़ रुपयेब: -2010-11 में 1188.32 करोड़ रुपये2011-12 में 1624.35 करोड़ रुपये2012-13 में 2485.73 करोड़ रुपये वर्तमान में यह आंकड़ा 4700 करोड़ रुपये जा पहुंचा है। 

👉🏻👉🏻 छग में 2015 से 2019 बीते पांच साल के दौरान 64199 सड़क हादसे हुए। इनमें 21756 लाेगाें की माैत हो गई और 6,0087 लाेग घायल हो गए। गंभीर बात यह है कि मरने वालों में आधे से अधिक यानी 13006 लोगों की मौत नशे के कारण हुई ।


लेखक  – गणेश अग्रवाल