अंततः महाजेनको अडानी की तमनार स्थित गारे पेलामा सेक्टर 2 को मिली पर्यावरण स्वीकृति !जन चेतना के ग्रीनमेन रमेश अग्रवाल एनजीटी जाने की तैयारी…!


रायगढ़, 15 अक्टूबर ।तमाम विरोधों और तीन तीन बार जन सुनवाई स्थगित होने और अनुसूचित जनजाति आयोग के विरोध के बावजूद अडानी की बहुचर्चित कोयला खदान को पर्यावरण स्वीकृति मिल ही गई है।
इसके पूर्व 5 दिसंबर 2019 को केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने आधी अधूरी व गलत जानकारी देने पर प्रस्ताव वापस कर दिया था जिस पर महाराष्ट्र पावर जनरेशन कंपनी जो कि महाजेनको के नाम से जानी जाती है ने दुबारा प्रस्ताव दिया। 28 सितंबर 2020 को मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी ने इस विशाल
कोयला खदान को स्वीकृति देने की अनुशंसा कर दी है।

2583.48 हेक्टेयर में फैली इस कोयला खदान से 22 मिलियन टन कोयला ओपनकास्ट और 1.6 मिलियन टन अंडरग्राउंड माइनिंग से निकाला जाना है | तमनार तहसील के 14 ग्राम पूरी तरह या आशिंक रूप से उजाड़ जायेंगे।
27.09.219 को हुई जन सुनवाई में ग्रामीणों ने पुरजोर विरोध कर बहिष्कार कर दिया था | जन सुनवाई में लगाये गेट पर धरना देकर किसी को अन्दर नहीं जाने दिया | लेकिन कंपनी इधर उधर से 50-60 लोगों को अन्दर घुसाने में सफल हो गई और इसके साथ ही जन सुनवाई की खानापूर्ति भी पूरी कर ली गई।

गोल्डमेन इनवायरमेंट प्राइज और जन चेतना के सदस्य रमेश अग्रवाल शुरू से ही इस परियोजना के खिलाफ थे और हाईकोर्ट भी गये थे जिसके कारण जन सुनवाई स्थगित करनी पड़ी थी।

रमेश अग्रवाल का कहना है इस कोयला खदान से पड़ने वाले सभी प्रभावों का सटीक अध्ययन किया ही नहीं गया। ईआईऐ रिपोर्ट पूरी तरह गलत और कॉपी पेस्ट का किया है।जन सुनवाई पूरी तरह नियम विरुद्ध करवाई गई है। पर्यावरण मंत्रालय ने भी केवल खानापूर्ति कर इस विनाशकारी परियोजना को इससे पड़ने वाले पर्यावरण, सामाजिक प्रभावों को अनदेखा कर मंजूरी दे दी है। इस स्वीकृति के खिलाफ वे एन. जी. टी. में याचिका दायर करने का मन बना चुके हैं।