करतला वन परिक्षेत्र में लकड़ी तस्करों के हैं हौसले बुलंद, कट रहे इमारती लकड़ियों के बेशकीमती पेड़…!


कोरबा (करतला) 10 अक्टूबर। जिले के कोरबा वनमण्डल अंतर्गत करतला वन परिक्षेत्र के अंतर्गत स्थित ऊपरी क्षेत्र बरपाली के अंतर्गत आने वाले जंगलों में लकड़ी तस्करों द्वारा अवैध रूप से रोज बहुत से पेड़ काटे जा रहे हैं जिसकी भनक यहां उपस्थित डिप्टी रेंजर एवं बिट प्रभारी को भी नहीं है। इनसे पूछने पर यह कहा जाता है कि हमें इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर बात जंगल के अंदर पेड़ काटने की होती तो समझ में आता कि वास्तव में इन्हे जानकारी नहीं होगी। परंतु बरपाली से झीका की ओर जाने वाले पक्की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क के किनारे रोज कितने पेड़ कट रहे हैं जिसके ठुठ देखे जा सकते हैं। जहां से रोज बीट प्रभारी गुजरते हैं परंतु अभी तक ना तो किसी ग्रामीण के ऊपर और ना ही लकड़ी तस्करों के ऊपर कोई कार्यवाही की गई।कार्यवाही के नाम पर इनके द्वारा उन गरीबों की लकड़ी को पकड़ा जाता है जो जलाऊ लकड़ी के रूप में घर में लकड़ी रखते हैं और उसे जलाऊ लकड़ी के रूप में उपयोग करते हैं परंतु इस तरह की घटना लकड़ी तस्कर के साथ मिलीभगत है या इनकी मौन स्वीकृति है यह समझ से परे है।

जो भी हो परंतु इससे यह बात तो साबित होती है कि वन विभाग पूर्ण निष्क्रिय है।बरपाली में वन विभाग का डिपो है। इस तरह की घटना बरपाली के आसपास होना अपने आप में या शक पैदा करती है कि हो ना हो इसमें वन विभाग की मौन स्वीकृति है। बरपाली उपपरिक्षेत्र के अंतर्गत बरपाली, ढनढ़नी, मड़वारानी, भैसामोड़ा, सण्डेल आदि गांव आते हैं परंतु बरपाली और नंदिनी के जंगलों में इस तरह की कटाई अधिक मात्रा में होती है। उप परिक्षेत्र के अंतर्गत जितने भी गांव आते हैं। सभी गांव में वन प्रबंधन समिति बनाया गया है परंतु यह समिति भी निष्क्रिय है। क्योंकि वन विभाग कर्मचारियों द्वारा इन्हें ना तो कोई जानकारी दी जाती है और ना कोई योजना के बारे में बताया जाता है। वन प्रबंधन समिति इसलिए बनाया जाता है। ताकि गांव के अंदर आने वाले जंगलों की देखरेख की जा सके एवं गांव में कोई व्यक्ति यदि जंगल से लकड़ी काट के नाता है तो उसकी शिकायत वन समिति द्वारा वन विभाग को की जाती है परंतु ऐसा नहीं होता। क्योंकि वन विभाग के कर्मचारी ना तो इस समिति की ओर ध्यान देते हैं और ना ही इनको किसी योजना के बारे में बताते हैं। बरपाली में भी वन विभाग का डिपो है जिसमें कभी भी दाह संस्कार हेतु लकड़ी उपलब्ध नहीं रहता जो कि आसपास के 10 गांव की जरूरत है। यह बात वन विभाग की निष्क्रियता को साबित करती है।

यहां का वन विभाग पूर्ण रूप से निष्क्रिय है जिन्हें ना तो वन की चिंता है और ना ही डिपो की वन में ना तो पेंड सुरक्षित है और डिपो में ना ही लकड़ी मिलती है
निलेश अग्रवाल
पूर्व उप सरपंच बरपाली

मैं जब जंगल की ओर सैर के लिए जाता हूं तो मुझे भी रोड किनारे बहुत से कटे हुए पेड़ की ठूंठ दिखाई देते हैं जो साबित करते हैं कि जंगलों में पेड़ की अंधाधुंध कटाई हो रही है
अजय सोनी
उप सरपंच बरपाली