24×7 बड़ी खबर: 123 मिठाइयों की उम्र हुई तय, कलाकंद की उम्र अब 12 ही, जाने सभी मिठाइयों की लाईफ…


बिलासपुर 22 अक्टूबर 2020:- गुझिया, घेवर, आटा लड्डू, शकरपारा, मूंग का हलवा, आटा का हलवा। 123 मिठाइयों में से ये कुछ नाम है जो आमतौर पर घरेलू मिठाइयों के रूप में जाने जाते हैं लेकिन ये घरेलू मिठाईयां अब घरों की देहरी से निकलकर स्वीट कॉर्नरों तक पहुंच चुकी है। लिहाजा इन पर भी फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट की नजर होगी। नए नियम के अनुसार अब इसकी बिक्री के पहले इनकी सेल्फ लाईफ तारीख बतानी होगी। थोड़ी सी भी ना-नुकुर की तो खैर नहीं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने दीपावली 2020 से अपने नियमों को कुछ ऐसे आमूल-चूल परिवर्तन किए हैं उनके पालन में यदि पूरी गंभीरता से काम दिए गए तो मिलावटी उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच सकेगी साथ ही यह क्षेत्र ऐसी शिकायतों से मुक्त किया जा सकेगा।

पहली बार प्राधिकरण ने 123 ऐसी मिठाईयों की सूची जारी करते हुए जिले में पदस्थ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को जांच का जैसा वृहद अधिकार दिया है उसके बाद इस क्षेत्र में निश्चित ही क्रांतिकारी बदलाव देखा जा सकेगा। इस नए नियम के बाद हर मिठाईयों की ट्रे में निर्माण और बेस्ट बिफोर की तारीख का अंकित किया जाना लागू कर दिया गया है।

इसलिए कड़ाई

प्राधिकरण ने अपने पिछले 5 साल की जांच रिपोर्ट में यह पाया है कि मिठाई कारोबार में मिलावट की शिकायत में लगातार वृद्धि हो रही है। सीमित संख्या में जांच अधिकारियों की वजह से भी जांच का काम पूरी गति से नहीं किया जा रहा है। इसका फायदा होटल और स्वीट कॉर्नर उठा रही है। इसलिए इस तरह के कारोबार की पहली ही सीढ़ी को कड़ी निगरानी के घेरे में लेते हुए मिठाईयों की सभी किस्मों पर नए नियम का बंधन लगा दिया है। इससे जांच अधिकारियों को जांच में आसानी होगी क्योंकि यदि तारीख झूठी निकली तो कड़ी कार्रवाई का पहला आधार यहीं से बनाया जा सकेगा।

पहली बार घरेलू मिठाईयां भी

प्राथिकरण ने 123 मिठाईयों की जो सूची जारी की है उसमें कुछ नाम बेहद चौंकाने वाले हैं। जो नाम चौका रहे हैं उनमें गुझिया, शकरपारा, घेवर, बेसन चक्की, बेसन का लड्डू आटा का हलवा, मूंग का हलवा और आटा का लड्डू मुख्य है। दरअसल बीते कुछ साल से यह देखा जा रहा है कि घरों में बनने वाले व्यंजन होटल और स्वीट कॉर्नर में भी बनने और बिकने लगे हैं। लिहाजा इसमें भी मिलावट और और निर्माण की तारीखों में हेराफेरी की भरपूर आशंका है क्योंकि उपभोक्ताओं का घरेलू व्यंजनों पर सदियों से भरोसा जमा हुआ है।

पांच श्रेणियों में 123 मिठाईयां

प्राधिकरण ने नए नियम में निर्माण के दिन ही बिकने वाली मिठाईयों को सबसे पहले नंबर पर रखा है। इनमें चार मिठाईयां है। इनमें कलाकंद, बटर स्कॉच कलाकंद, रोज कलाकंद और चॉकलेट कलाकंद ऐसी मिठाईयां हैं जिनकी बिक्री उसी दिन करनी होगी, जिस दिन यह बनाई जाएंगी। दूसरी श्रेणी में 2 दिन की सेल्फ लाईफ वाली मिठाईयों के नाम हैं। दूध से बनी और बंगाली मिठाईयां है । जिनकी उम्र महज 2 दिन तय की गई है। तीसरी श्रेणी में 38 मिठाईयां रखी गई है जिनकी उम्र 4 दिन मानी गई है। इसमें खोवा से बनी सभी मिठाइयों को लिया जा चुका है। चौथी श्रेणी में 7 दिन की उम्र वाली 25 मिठाईयां होंगी। इनमें मेवा से बनने वाली मिठाईयां होंगी। फलों से बनने वाली मिठाईयां भी इसी श्रेणी में शामिल की गई है। पांचवीं श्रेणी को सबसे ज्यादा 30 दिन की उम्र वाली मिठाईयां मानी गई है। इनमें चना बेसन आटा और खजूर से बनाई गई मिठाईयां होंगी। प्राधिकरण ने पूरी सूची जारी करके यह साफ कर दिया है कि प्राधिकरण और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की नजर हर उस व्यंजन पर होगी जो बनाई और बेची जा रही है।