वनों के संरक्षण तथा विकास सहित ग्रामीणों की आय बढ़ाने में सामुदायिक वन अधिकार महत्वपूर्ण- मुख्यमंत्री बघेल


गांधी जयंती के अवसर पर रायगढ़ जिले में 33 हजार हेक्टेयर से अधिक के 112 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र का वितरण

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मुख्यमंत्री बघेल ने कलेक्टर भीम सिंह को दी बधाई, पट्टेधारियों को भी दी शुभकामनाएं

रायगढ़ 2 अक्टूबर 2020:- मुख्यमंत्री बघेल द्वारा आज यहां निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलों में आयोजित सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण अधिकार पत्र वितरण समारोह में 5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के लगभग 1300 सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण अधिकार पत्रों का वितरण किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री बघेल ने रायगढ़ जिले में वितरित किये जा रहे अधिकार पत्रों की जानकारी ली। कलेक्टर भीम सिंह ने बताया कि जिले में 33 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के 112 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र का वितरण किया जा रहा है तथा पूर्व में विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर 4477 सामुदायिक अधिकार पत्रों का वितरण किया गया है।

मुख्यमंत्री बघेल ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कलेक्टर भीम सिंह को बधाई दी साथ ही व सामुदायिक पट्टेधारियों को भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पट्टा मिलने के बाद महात्मा गांधी की परिकल्पना को धरातल पर उतारकर देश-दुनिया को दिखाना है कि वन अधिकार पट्टे से ग्रामीणों को समग्र रूप से रोजगार मिल रहा है और उनके आय के साधन बढऩे से स्वावलंबी बनने लगे हैं। उन्होंने कहा कि सामुदायिक वन अधिकार के वितरण से जंगल के वनवासियों को उनका अधिकार मिल रहा है। इससे वनों का संरक्षण, विकास और ग्रामीणों के आजीविका के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध होंगे। वर्ष भर काम मिलने से वनों पर निर्भर रहने वाले आदिवासियों को काम की तलाश में पलायन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि सामुदायिक पट्टा वितरण के बाद जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी है कि वे संबंधित गांव के लोगों को यह जानकारी दे कि किस गांव में कितने क्षेत्रफल का कितना पट्टा दिया गया। इसके साथ ही हर गांव में वहां उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जाए। कार्ययोजना इस प्रकार तैयार की जाए कि वनवासियों को सालभर रोजगार उपलब्ध हो। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए राजस्व, वन, कृषि तथा उद्यानिकी सहित मनरेगा योजना और अन्य विभागों का सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस क्षेत्र में विशेष वनोपज का उत्पादन होगा। वहां उसकी प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की कार्ययोजना भी बनाई जाए। इससे वनावासियों की सतत रूप से आमदनी भी बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सामुदायिक अधिकार के अंतर्गत सामुदायिक वन संसाधन का संरक्षण, पुनर्जीवन एवं प्रबंधन कार्य भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत जन सुविधा जैसे- विद्यालय, औषधालय, आंगनबाड़ी, उचित मूल्य की दुकान, विद्युत एवं दूर संचार लाइन, टंकियां एवं लघु जलाशय, पेयजल की आपूर्ति एवं जल पाईप लाइन, जल या वर्षा जल, संचयन की संरचनाएं, लघु सिंचाई नहर, आपारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत, कौशल उन्नयन या व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र, सड़के एवं सामुदायिक केन्द्रों सहित के कार्य विभागों को प्रदाय किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनवासियों को सम्मान के जीवन के साथ-साथ अतिरिक्त आय के संसाधन उपलब्ध कराने के लिए फलदार, लघु वनोपज एवं औषधी रोपण, सब्जी उत्पादों आदि लाभदायक फसलों को लगाया जाए। इससे जंगल कटने से बचेंगे और यहां के वनवासी जंगलों का संरक्षण भी करेंगे। मुख्यमंत्री ने विशेषकर फलदार तथा लघु वनोपज पर आधारित पौधे जैसे- ईमली, आम, हर्रा, बहेड़ा, आंवला आदि वनोपज के रोपण पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिलों में उपस्थित वन अधिकार समितियों के पदाधिकारियों से चर्चा भी की और उन्हें सामुदायिक वन अधिकार संरक्षण पत्र के तहत प्रदाय भूमि का स्वरोजगार के लिए अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। बघेल ने इंदिरा वन मितान समूह के गठन करने के लिए जोर दिया।

इस अवसर पर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, वनमंत्री मोहम्मद अकबर, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अमरजीत भगत, विधायक मोहन मरकाम, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव वन मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमलसिंह परदेशी, सचिव आदिम जाति कल्याण डी.डी.सिंह, प्रधान मुख्य वनसंरक्षक राकेश चतुर्वेदी, मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी, विनोद वर्मा और रूचिर गर्ग उपस्थित थे।