रायपुर : मुख्यमंत्री श्री बघेल राज्योत्सव पर एक नवम्बर को प्रदेश के 18.38 लाख किसानों को देंगे राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किश्त


  • किसानों के खाते में तीसरी किश्त के रूप में करेंगे 1500 करोड़ रूपए का अंतरण
  • अब तक योजना की दो किश्तों में किसानों को दिए गए 3 हजार करोड़ रूपए

रायपुर, 31 अक्टूबर 2020- मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्योत्सव के कार्यक्रम में प्रदेश के 18 लाख 38 हजार 592 किसानों के खाते में राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किश्त के रूप में 1500 करोड़ रूपए की राशि का अंतरण करेंगे। कृषि क्षेत्र में पर्याप्त निवेश और काश्त लागत में राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों को आदान सहायता राशि प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत प्रथम और द्वितीय किश्त की राशि के रूप में 1500-1500 करोड़ रूपए, कुल 3 हजार करोड़ रूपए का भुगतान किसानों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डी.बी.टी.) के माध्यम से किया जा चुका है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना में चार किश्तों में किसानों को 5750 करोड़ रूपए का भुगतान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री बघेल एक नवम्बर को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत जिन किसानों के खातों में राशि का अंतरण करेंगे, उनमें से रायपुर संभाग के 5 लाख 60 हजार 794 किसानों के खाते में तृतीय किश्त के रूप में कुल 463 करोड़ 86 लाख रूपए की राशि, दुर्ग संभाग के 5 लाख 57 हजार 303 किसानों के खाते में 428 करोड़ 13 लाख रूपए की राशि, बिलासपुर संभाग के 4 लाख 56 हजार 100 किसानों के खाते में 391 करोड़ 63 लाख रूपए, सरगुजा संभाग के एक लाख 19 हजार 531 किसानों के खाते में 104 करोड़ 50 लाख रूपए और बस्तर संभाग के एक लाख 44 हजार 864 किसानों के खाते में 111 करोड़ 88 लाख रूपए की राशि का अंतरण तृतीय किश्त के रूप में करेंगे।
    

इस योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों में 9 लाख 55 हजार 531 सीमांत कृषक, 5 लाख 61 हजार 523 लघु कृषक और 3 लाख 21 हजार 538 दीर्घ कृषक हैं। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत धान, मक्का और गन्ना उत्पादक किसानों को आदान सहायता दी जा रही है। इस योजना का क्रियान्वयन खरीफ 2019 से प्रारंभ किया गया है। आने वाले समय में इस योजना में खरीफ मौसम में सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, रामतिल, कोदो, कुटकी उत्पादक किसानों को शामिल किया जाएगा।