भिलाई स्टील प्लांट में 26 से राष्ट्रीय हड़ताल, प्रबंधन इसे विफल करने की जुगत में,


भिलाई 19 नवंबर 2020:- लंबित वेतन समझौता सहित तमाम विषयों को लेकर 26 नवंबर को राष्ट्रीय हड़ताल प्रस्तावित है। इसको विफल करने का प्लान भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने बनाना शुरू कर दिया है। 40 हजार से ज्यादा नियमित और ठेका मजदूरों को कार्यस्थल पर ही रोकने का प्लान बनाया गया है। समय से पहले ही ड्यूटी पर बुलाया जाएगा। सुबह आने वालों को एक दिन पहले रात में ही बुलाने का प्लान है। कर्मचारियों के लिए कार्यस्थल पर ही भोजन की व्यवस्था भी की जाएगी।

इस बार केंद्रीय यूनियनों के आह्वान पर स्थानीय यूनियनों ने भी घेराबंदी कर दी है। सात यूनियनों ने एकजुटता दिखाने का दम भरा है। खास यह है कि अधिकारियों से भी समर्थन मांगा जा रहा है।

अधिकारियों का भी वेतन समझौता रुका हुआ हैै। अधिकारी हड़ताल कर नहीं सकते इसलिए कर्मचारी हड़ताल में समर्थन मांग रहे हैं।

इस तरह से हड़ताल को विफल करने की योजना को ही ध्वस्त करने का रास्ता निकाल लिया गया है। हड़ताल को विफल करने में हर बार अधिकारी योगदान देते थे। इस बार बदली परिस्थितियों में अधिकारियों से खामोश रहने की अपील की जा रही है।

विभागवार दौरा और कर्मियों से हो रहा संवाद

इधर, भिलाई इस्पात संयंत्र में इस बार एकजुटता का संदेश ट्रेड यूनियन के नेता देना शुरू कर चुके हैं। इंटक, एचएमएस, सीटू, इस्पात श्रमिक मंच, एटक, एक्टू और स्टील वर्कर्स यूनियन ने तीन टीम बनाई हैं। यह टीम प्लांट के अलग-अलग हिस्सों में दौरा कर रही हैं। कर्मचारियों से संवाद स्थापित कर रही। विभागवार दौरा किया जा रहा।

कर्मचारियों को सरकार की गलत नीतियों की जानकारी दी जा रही। श्रम कानूनों में हो रहे बदलाव से कर्मियों को होने वाले नुकसान से भी अवगत कराया जा रहा है। गुरुवार को संयंत्र के मिल, मैकेनिकल और कोक ओवन, ओएचपी आदि क्षेत्रों में तीन टीम ने जन जागरण अभियान चलाया।

जानिए श्रमिक संगठन का क्या कहना…

इंटक के अतिरिक्त महासचिव संजय साहू ने कहा कि बीएसपी प्रबंधन हड़ताल को विफल करने के लिए अपना काम कर रही है। कर्मचारी यूनियन प्रबंधन की प्लानिंग को ही विफल करने में जुट चुकी हैं। 26 नवंबर की हड़ताल सफल होगी। मारपीट करके प्रदर्शन नहीं कर सकते। कर्मचारियों को समझ में आ रहा है कि इस बार खामोश रहे तो नुकसान बड़ा होगा।

वहीं, एचएमएस के महासचिव प्रमोद कुमार मिश्र ने कहा कि प्रबंधन का हमेशा से प्रयास रहा है कि हड़ताल को विफल किया जाए। इस हड़ताल से कर्मचारियों के साथ अधिकारियों का भी फायदा है। उनका भी वेतन समझौता रुका हुआ है। अधिकारियों से भी समर्थन मांगा जा रहा है। उम्मीद है कि पूरा सहयोग मिलेगा। दोनों वर्ग मिलकर इस्पात उद्योग को बचाएंगे।

सीटू के महासचिव एसपी डे ने कहा कि लंबित वेतन समझौता, श्रम कानून सहित कई मुद्दों पर हड़ताल होने जा रही है। संयुक्त रूप से यूनियन नेताओं ने टीम बनाई है, जो विभागवार दौरा कर रही है। कर्मचारियों के सवालों का जवाब भी दिया जा रहा है। सरकार और सेल की नीतियों से होने वाले नुकसान की जानकारी कर्मचारियों को दी जा रही है।

इस्पात श्रमिक मंच के महासचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि इस बार संयुक्त रूप से हड़ताल स्थानीय स्तर पर भी हो रही है। प्रबंधन के बुलावे पर कोई भी यूनियन अकेले नहीं जाएगी। संयुक्त रूप से ही चर्चा करेंगे। हर विभागों में बैठक ले रहे हैं। छोटी-छोटी मीटिंग हो रही है। संयंत्र के सभी प्रवेश द्वारों पर पर्चा विरण किया जा रहा है। हड़ताल के लिए कोई जबरदस्ती नहीं करेंगे।

एक्टू के महासचिव श्याम लाल साहू ने कहा कि पर्चा वितरण और गेट पर मीटिंग जोर है। विभागों में संवाद किया जा रहा है। हड़ताल क्यों जरूरी है, यह भी बताया जा रहा है। कारपोरेट परस्ती नीति कर्मचारियों के खिलाफ है। इसके खिलाफ खड़े नहीं हुए तो संयंत्र सहित कर्मचारियों का नुकसान होगा। एक दिन अपना गुस्सा जाहिर करने का सबको मौका मिल रहा है।

एटक के महासचिव विनोद कुमार सोनी ने कहा कि हड़ताल को सफलता की ओर लेकर चल रहे हैं। कर्मचारियों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं। एटक ने 10 हजार पर्चे छापवाए हैं। इसको संयंत्र के हर गेट पर बांटा जा रहा है। मजदूर वर्ग को हड़ताल का महत्व समझना होगा। निजीकरण, श्रम कानून और वेतन समझौता कोई छोटा मुद्दा नहीं है।