भारत मे टेलीमेडिसिन अत्यंत आवश्यक और सस्ता उपाय : डॉ. राका शिवहरे

रायपुर। कोरोना काल की महामारी ने पूरे विश्व में टेलीमेडिसिन की उपयोगिता एवम ज़रूरत को ना सिर्फ सिद्ध किया बल्कि चिकित्सकीय परामर्श प्रणाली में एक नवोदित और समायोचित आयाम की तरह खड़ा कर दिया है। कोरोना काल में चारों ओर अव्यवस्था और भय का माहौल था तब रायपुर (छ.ग.) के मधुमीत डायबिटीज हॉस्पिटल और मेधावी मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ राका शिवहरे डॉ एवं शिखा जायसवाल और इंदौर से डॉ भरत साबू ने टेलीमेडिसिन पे अपना रिसर्च पेपर लिखा और जो विश्व की ख्यातनाम कांफ्रेंस यूरोपियन सोसायटी ऑफ इंडोक्रिनोलोजी में प्रकाशित हुआ और संभवत भारत से इस विषय मे प्रकाशित होने वाला पहला शोधपत्र बना।

अंचल के इन मेधावी डॉक्टरों ने करीब 500 मरीजो पे रिसर्च करके यह बताया कि भारत जैसी अर्थव्यवस्था वाले देश में टेली मेडिसिन कितनी उपयोगी सिद्ध हो सकती है। अब जबकि देश में करीब करीब हर घर में टेक्नोलोजी, मोबाइल और इंटरनेट का अच्छा उपयोग करने लगे है और लोगों को सोशल मीडिया की भी अच्छी जानकारी हो गई है साथ ही लोग कार्ड फोन पे, ई पेमेंट भी करना सीखते जा रहे है, तो वो दिन दूर नही जब घर बैठे ही वो किसी भी बड़े डॉ से अपने फोन पर ही समाधान की सुविधा का फायदा उठाने में भी सक्षम हो जाएंगे।

इस तरह अच्छे और सुपरस्पेशलिस्ट डॉ. जो कि बड़े शहरों में ही अपनी सुविधाएं दे पाते है वो भी इंटरनेट की मदद से समयानुकूल समाधान दे पाएंगे।

डॉ. राका शिवहरे ने बताया कि यह स्टडी उन्होंने पूर्ण कोरोना लोक डाउन के कठिन समय में 1 अप्रैल 2020 से 15 मई 2020 के दौरान सर्वे करके की, जब मरीजो के अंदर कोरोना को लेके बहुत आशंकाए थी और वो अपनी पुरानी बीमारियों के लिए भी विशेषतः चिंतित थे। ऐसे समय पे फ़ोन पे, वीडियो कॉल पे और व्हाट्स एप्प पे बात करने के अलावा कोई चारा नही था और ऐसी निराशा के समय पे टेलीमेडिसिन प्लेटफार्म एक बेहतर मेडिकल नर्सिंग केयर सखा बनके उभरा।

डॉ राका शिवहरे ने बताया कि लगभग 54% मरीजो ने टेली कंसल्टेशन चुना जबकि 46% को वीडियो कंसल्टेशन ज्यादा बेहतर माध्यम लगा।

डॉ शिखा जायसवाल ने बताया कि कोरोना काल की गंभीरता को देखते हुए 66% मरीजो ने टेलिकन्सल्टेशन को बेहतर माना । पर 77% ने यह भी कहा कि महामारी काल के खत्म होते ही वो स्वयं मिलकर दिखाना ही पसंद करेंगे।

डॉ राका शिवहरे ने बताया कि टेलिकलसल्टेशन लेने वाले सबसे ज्यादा मरीज हाई सुगर और
बी पी से ग्रसित थे और उन्होंने पहली बार घर मे अपनी मॉनिटरिंग की और चूंकि अस्पताल आने में डर था इस लिए पहली बार डॉ. को रीडिंग बताने हेतु वो पहली बार ख़ुद अपने ऊपर अभिभूत हुए और खुद घर बेठे सुगर और बी पी नापा जिससे पहली बार उन्हें ही अपनी बीमारी की गंभीरता और लक्षण समझ आ सके।

मधुमीत डायबिटीज हॉस्पिटल की पूरी टीम और डॉ. राका शिवहरे एवम शिखा जायसवाल ने इस रीसर्च के माध्यम से वस्तुतः यह समझने का भरपूर प्रयास किया कि अगर हमारे देश चिकित्सा के क्षेत्र में स्वावलम्बी बनना चाहता है तो पूरे देश वासियों का हेल्थ इंडेक्स अच्छा होना चाहिए और हेल्थ तभी अच्छी होगी जब सबको हेल्थ की सुविधाएं उनके घर तक पहुच के मिल सके उससे देश की ऊर्जा पैसा एयर ईंधन भी बचेगा और हमें देश को उन्नत बनाने के लिए यह टेक्नॉजिकल छलांग लगानी ही होगी।