ठंड में कोरोना की दूसरी लहर पारा गिरने से नहीं, प्रदूषण और घर बंद रहने की वजह से


रायपुर। प्रदेश में ठंड में कोरोना की दूसरी लहर को लेकर यह आम सोच है कि मौसम ठंडा होने की वजह से कोरोना का खतरा बढ़ जाएगा, लेकिन विशेषज्ञों ने साफ किया है कि तापमान का कोरोना वायरस पर कोई असर प्रमाणित नहीं हुआ है। विशेषज्ञ डाक्टरों के मुताबिक आमतौर से ठंड में फ्लू वाले वायरस सक्रिय रहते हैं। खतरा ये है कि कोरोना की वजह से आने वाले बुखार को लोग पांच-सात दिन टाल सकते हैं कि सामान्य मौसमी बुखार होगा। दूसरा, ठंड के मौसम में घर अक्सर बंद रहते हैं। इस वजह से भीतर के वायरस भीतर रह जाते हैं और संक्रमण फैलने का खतरा अधिक हो जाता है। यही नहीं, ठंड में सतह से 50-60 फीट ऊंचाई तक प्रदूषण अधिक रहता है। कुछ यूरोपीय और अमेरिकी स्टडी में साबित हो चुका है कि कोरोना वायरस को प्रदूषण मल्टीप्लाई करने में मददगार है। इसलिए ठंड में कोरोना की दूसरी लहर की आशंका जताई गई है, तापमान में कमी का इससे कोई संबंध नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना को लेकर भविष्यवाणी करना ठीक नहीं है, लेकिन ठंड में इसे बढ़ाने वाले कई फैक्टर काम करेंगे। ठंड में प्रदूषण बढ़ने के कारण फेफड़े में संक्रमण बढ़ जाता है। फेफड़ा पर्याप्त मात्रा में शरीर के अन्य अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता। इस कारण दूसरे अंग भी प्रभावित होते हैं। इस दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। जहां रोग प्रतिरोधक क्षमता या फेफड़ा कमजोर हुआ, तब कोरोना संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। ठंड शुरू होते ही वायरल फीवर व फ्लू का सीजन शुरू हो चुका है। जिन्हें अस्थमा, एलर्जी व सांस लेने में तकलीफ होती है, उनके लिए कोरोना ज्यादा खतरनाक है। आम लोगों के लिए यह समझना आसान नहीं होगा कि यह कोरोना के संक्रमण के कारण हो रहा है या मौसम के कारण।

जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव उनकी स्वाइन फ्लू जांच
कोरोना व स्वाइन फ्लू के लक्षण में खास अंतर नहीं है। इसलिए जिन लोगों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आएगी, डाक्टरों ने उनकी स्वाइन फ्लू जांच भी करने की अनुशंसा की है। स्वाइन फ्लू एच 1 एन 1 वायरस से फैलता है। राजधानी व प्रदेश में कोरोना का पहला मरीज 18 मार्च को मिला था। सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. युसूफ मेमन व पीडियाट्रिशियन डॉ. शारजा फुलझेले के अनुसार कोरोना के केस आने के बाद सरकारी व प्राइवेट लैब में स्वाइन फ्लू की जांच नहीं हो रही है। जिनमें लक्षण है, ऐसे लोगों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव होने के बाद भी स्वाइन फ्लू जांच जरूरी है।


“ठंड में कोरोना के केस बढ़ने का खतरा इसलिए ज्यादा है क्योंकि एक तो यह त्योहारी सीजन है। दूसरा, लोग इस सीजन में यात्रा भी करते हैं। दोनों ही मामलों में लोग ज्यादा से ज्यादा संपर्क में आते हैं। यही नहीं, ठंड से प्रदूषण बढ़ता है और यह कोरोना वायरस को मल्टीप्लाई करने में मददगार है। इसके अलावा, जहां भी कोरोना के केस कुछ कम हुए हैं, वहां लोग बेपरवाह हो गए हैं और जरूरी ऐहतियात भी नहीं बरत रहे हैं।”


– डॉ. रवि वानखेड़कर, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष

“दुनिया में ठंड में कोरोना के केस बढ़े हैं। प्रदेश में भी ठंड में कोरोना का रिस्क ज्यादा है। अभी केस कम तो हुए हैं, पर रिस्क कम नहीं हुआ है। ठंड में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। पटाखे का धुंआ भी प्रदूषण बढ़ाएगा, जिससे कोरोना का खतरा बढ़ेगा।”

-डॉ. नितिन एम नागरकर, डायरेक्टर एम्स


“ठंड में ज्यादातर घरों में खिड़कियां बंद रहती है। लोग घरों में बंद रहते हैं। इस दौरान खांसने व छींकने से परिवार के दूसरे सदस्य भी संक्रमित होंगे। सामान्य फ्लू या अस्थमा के कारण जो समस्या होगी, इसे लेकर लोग कंफ्यूज रह सकते हैं।”


-डॉ. आरके पंडा, सदस्य कोरोना कोर कमेटी