छत्तीसगढ़ के रहन सहन, बात विचार के दरसन करव

24×7 News Desk:- आधुनिकता मा रंगे रंगोली के शोभा गांव-गांव मा देखे बर मिलथे। नवा-नवा सभ्यता के विकास दरसन गांव मा घलो करे जा सकत हे ( यह दरअसल सार संक्षेप होता है। इसे हमें लिखना होता है और इसे कॉपी करके नहीं लिखना चाहिए। लिहाजा हर बार लेख लिखने के बाद इसे आप लिख दें तो बड़ी कृपा होगी)

छत्तीसगढ़ मा गाँव के नागरिक समाज आज समय के साथ चले बर तैयारी मा लगे हे। किसनहा परिवार आज भी किसानी काम-बुता मा लगे हे। पढ़े लिखे शिक्षित नौजवान छोटे-छोटे रोजी रोजगार मा मन ला लगा के भिड़े रइथे। मई लोगन मन के सहयोग आज विशेष महत्वपूर्ण समाज के निर्माण मा दिखथे।

तिहार बार मा आजो गांव के महाराज मन तिथि बार बताए बर आथें। मोला पूरा छतीसगढ़ मा गांव-गांव मा जाए के मौका मिले हे, इकरे सेती मे अनुभो करे हंव के मुंधरहा ले लोगन अपन-अपन काम बुता मा लग जाथें।

परिवर्तन -1. साधन, सुविधा सम्पन्न’ परिवार गांव के संगे-संग शहर मा अपन परिवार ला लेगे के उदिम मा लग गेहे। ऊंखर नवा पीढ़ी अंग्रेजी माध्यम के नामी इसकुल मा पढ़े ला जाए लागिन।

2. पहली गांव मा पारा राहय आज गांव-गांव मा भांठापारा मिल जाही। गांव-गांव मा भांठापारा के संस्कृति के विकास अलग ले दिखथे। कच्चा-पक्का मकान के बीच ऊंहचो अंग्रेजी इसकुल खुल गेहे। पढ़े लिखे महिला, पुरुष कम तनखा हे तभो ले प्राइवेट काम मा लगे इइथें। टिवसन पढ़े अउ पढ़ाए के फेशन गांव मा घलोक आगे हे।

3. सम्पन्न परिवार के मन जादातर नौकरिहा या बयपारी बन गेहे, एखर ले जेन बाहरी बयपारी गांव मा राहंय तेन शहर कोती आके होलसेल बयपारी हो गेहें।

4. कल-कारखाना खुले के सेती अलग-अलग प्रांत के संस्कृति देखे बर मिलत हे। दिन-रात चौबीसों घंटा चलइया कारखाना के कुहरा अउ राखड़ हा समस्या पैदा करे ला धर ले हे एमा चिंता होना चाही।

5. सिंचाई के साधन नइ होय के कारण सड़क तिर के भुंइया सब्बो बेचावत जाथे अउ पइसा अइसने सिरावत जाथे।

6. गांव मन मा छत्तीसगढ़ी भाषा बोलइया, लिखइया मन के मान बाढ़ गेहे। इकरे सेती किताब मा लिखे ज्ञान छत्तीसगढ़ी म बगराय के बात उठत रहिथे।

आगे चल के ए सब्बो परिवर्तन ला कइसे संजोके राखना हे एकर बर का करना हे ए विषय मा सोचना अउ जानना हे। का हो सकत हे बतावव ?

जइसे के सब्बो जानत हें के परिस्थिति के अनुसार समाज निरमाण होथे। जंगल-पहाड़ अऊ चातर राज मा अपन-अपन संस्कृति अउ संस्कार हावे। गांव के रहइया मनके आस्था अउ विश्वास ला देखबे त अचंभा लागथे। आजकल के विज्ञानी मन एला अंधविश्वास कहि के टालथें ए बने बात नोहे।

आधुनिकता मा रंगे रंगोली के शोभा गांव – गांव मा देखे बर मिलथे। नवा-नवा सभ्यता के विकास दरसन गांव मा घलो करे जा सकत हे। फल, फूल अउ कंद मूल खवइया के हाथ मा घलोक मोबाइल आगे हे। जनजीवन मा सामान्य प्रतिष्ठा आजो हावय नंदावत संस्कृति के चिंता होवत हे। विज्ञान के संगे संग संस्कृति के पूजा होना चाही।