“छटी मैया” व्रत की महिमा का वर्णन कविता के माध्यम से रायगढ़ के रचनाकार ने शब्दों में पिरोया है…


रायगढ़ 19 नवम्बर 2020:- बिहार राज्य की सबसे बड़ी पूजा छठी मैया का है। जो कल से प्रारंभ हो गया है। इसी संदर्भ में रायगढ़ के कवि जो अपनी कविता के माध्यम से हर किसी को अपनी लेखनी से प्रभावित करने में सफल रहे हैं। उन्होंने छठी मैया के व्रत की महिमा को अपनी लेखनी से शब्दों में पिरोया है। चलिए हम सब उनकी कविता को पढ़े और छठी मैया की महत्ता को जाने:-

छठी मैय्या

नहाय खाय से शुरू हुई है,
छठी मैय्या के पावन खरना,
हो गया है अराध्य की बेला,
अब सूर्य का होगा उपासना ।

डुबते सूरज को अर्घ्य हैं,
उगते सूरज का वन्दना,
व्रती माताओं बहनों की,
पूरन हो हर मनोकामना।

निर्जला उपवास करके आई,
पूरन कर मां मेरी कामना,
मैं दुखियारी घाट तुम्हारी,
सफल बना दे मेरी साधना।

अज्ञानी हूं फिर भी आई मां,
स्वीकार लें यह मेरी सत्कार,
जग को उजियारा देने वाली,
मैय्या की प्यार है अपरम्पार।

सूप भरा है, ठेकुआ है,
सेव, नारंगी और केला है,
डाभ सिंघाड़ा और गन्ना
अर्घ्य का मधुर बेला है।

उग रहा है लालिमा भरा,
दुनिया को रोशन करने वाला,
बीच पानी में खड़े भक्तों को,
जल्द है, दर्शन देने वाला।

रचनाकार-जयलाल कलेत
रायगढ़, छत्तीसगढ़