छत्तीसगढ़ की माटी गौवंशों के रक्त से फिर हुई लाल ! गाय बछड़े व बैल सहित करीब 50 गौवंशों की हुई मौत ! एक छोटे से पंचायत भवन को बना दिया अस्थायी गौठान और ठूस दिया गौवंशों को.. तड़प तड़प कर मर गए बेजुबान ! दिल दहल जाएगा आपका जब देखेंगे वीडियो..!


बिलासपुर 25 जुलाई। भारतवर्ष में गौवंशों को पूजा जाता है। इसलिए उन्हें सहेजने व उनसे लाभ लेने के लिए सरकार द्वारा कई प्रकार की योजना को लागू किया गया है। विशेषकर छत्तीसगढ़ में सरकार ने गौवंशों की देखरेख करने तथा उनसे प्रदेश को लाभ मिले उसके लिये करोड़ो की लागत से नरवा,गरुआ, घुरूवा, बारी जैसे वृहद योजना के अंतर्गत गौठान, रेका-छेका व गोधन न्याय योजना जैसे बड़े बड़े योजनाओं को लागू किया जा रहा है लेकिन उसके बाद भी इन मवेशियों की आय दिन मौत हो रही है। कभी कोई ट्रक इन्हें कुचल देता है तो कभी कोई खाने में जहर दे रहा, जगह जगह गाय बैल लावारिसों की तरह सड़कों पर घूमते फिरते रहते हैं । इन गांवों के मालिक इनके प्रति कितने लापरवाह हैं यह जगजाहिर है। पूरे प्रदेश में गौवंशों की मौत की खबर लगातार मिलते ही रहती है। आज फिर से एक ह्रदय विदारक दिल दहला देने वाली घटना का जानकारी मिल रही है।

बिलासपुर जिला अंतर्गत तखतपुर विकासखंड के ग्राम मेंड़पार बाजार से एक हृदय विदारक बड़ी घटी है। जहाँ लगभग 50 बेजुबान गौवंशों की किसी अज्ञात कारणों से मौत हो गयी है। बताया जा रहा कि आज सुबेरे गांव के सरपंच द्वारा अस्थायी गौठान में लगभग 50 गौवंशों की अज्ञात वजह से दर्दनाक मौत हो गयी है और सभी का शव क्षत विक्षत हालत में पड़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है मौके पर करीब 120 थी उनमें से लगभग 50 गाय की मौत हो चुकी है। खबर के बाद पूरे ईलाके में सनसनी और दुःख की लहर निर्मित है। इतनी बड़ी संख्या में बेजुबान गौवंशों की मौत के मामले में फिलहाल जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी फोन उठाने से बच रहे हैं या फिर गोलमोल जवाब दे रहे हैं और इस विषय में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

इस विषय में जब मेड़पार बाजार के सरपंच विनोद धृतलहरे से बात हुई तो उन्होंने बताया की :

“इस गांव में गौठान नहीं है इसलिये जर्जर पुराने पंचायत भवन में मवेशियों को रखा जा रहा है। मेरी स्वयं की तीन गायों की इसमें मौत हो गई हैं। अधिकारियों को मैंने जानकारी दे दी है और उनका कहना है प्रशासन और पशुपालन विभाग के अधिकारी ग्राम की ओर रवाना हो चुके हैं।”

मेड़पार बाजार में लगभग 50 गौवंशों जिसमें गाय, बछड़े तथा बैलों की मौत की दर्दनाक खबर आग की भांति पूरे क्षेत्र में फैल गई है। लाशों को देखने के लिए लोगों का हुजूम लग गया है। कुछ बेजुबान ततड़प रहें हैं तो लोग उन्हें पानी पिला रहें हैं। इस घटना से पूरा गांव सन्न हो गया है। गांव के लोग हतप्रभ हैं। समय बीतने के साथ लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों को पंचायत भवन के जर्जर कमरे में किसने बंद किया ? उस अज्ञात कारण की जानकारी हासिल करने के लिए गांव वाले भी लगे हुए हैं।

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लोगों की माने तो कोरोना वायरस के चलते ग्राम पंचायत के पुराने जर्जर भवन के मैदान को ही सरपंच और सचिव ने अस्थायी गौठान बनाया है। यहां करीब 120 गायों को घेरकर रखा गया है। बीती रात इनमें से करीब  50 गौवंशो की अचानक मौत हो गयी।

बहरहाल जिला प्रशासन को इस विषय की गंभीरता को समझते हुए इन सभी बेजुबानों की मौत की जांच की जानी चाहिए और संबंधित गुनहगारों को सलाखों के पीछे बंद करना चाहिये क्योंकि सुबह-सुबह गायों की मरने की खबर के बाद पूरे क्षेत्र में दुःख व आक्रोश व्याप्त है।