सितंबर महीने के महज 15 दिनों में 1 करोड़ 63 हजार का गोबर बेचने का रिकॉर्ड…विस्तार से पढिये


गोधन न्याय योजना से किसानों व पशुपालकों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन दिखने लगा है। सितंबर के पहले पहले पखवाड़े में किसानों ने एक करोड़ 63 हजार रुपए की कमाई कर ली है। इतना गोबर बेचने वाला राजनांदगांव प्रदेश का जिला पहला जिला है। महज 15 दिनों में जिले में 348 गोठानों में 11791 किसानों ने 50313.57 क्विंटल गोबर बेचा है। गोबर बेचने के मामले में राजनांदगांव ब्लॉक के किसान व पशुपालक जिले में अव्वल रहे। उन्होने 782655.50 किलो गोबर बेचकर सबसे अधिक 15.65 लाख रुपए की कमाई की है। गोधन योजना में स्व-सहायता समूह की महिलाों का जुड़ाव व पशुपालकों की रुचि को इसकी मूल वजह बताई जा रही है

जिले में 19 हजार से भी अधिक महिला स्व-सहायता समूह हैं जिनसे दो साल से ज्यादा महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भरता के लिए काम कर रही हैं। गोधन न्याय योजना की सफलता में इन्हीं महिलाओं की प्रत्याक्ष भूमिका बताई जा रही है। खरीदी में महिला समूहों को ही लगाया गया है। फिर उसका खाद बनाने में भी ये ही महिलाएं लगी हुई हैं। इतना ही नहीं गोठानों में खाद बनाकर उससे सब्जी की बाड़ी व अन्य खेती करने में भी महिलाएं उत्साह के साथ भूमिका निभा रहीं हैं। यही कारण है कि गोबर खरीदी में जिला पहले नंबर पर पहुंच गया है।

गोधन न्याय योजना से किसानों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं और अब उनकी जिंदगी बदल रही है। जिले में 1 से 15 सितंबर तक 348 गौठानों में किसानों व पशुपालकों ने एक करोड़ 63 हजार रुपये का गोबर बेचा। खरीदे गए गोबर से अब वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जा रहा है।

डोंगरगांव ब्लॉक में 367817.76 किलो गोबर खरीद कर 7.35 लाख रुपये, छुरिया में 399601 किलो गोबर खरीद कर 7 लाख 99 हजार 202 रुपये, डोंगरगढ़ ब्लॉक में 306702 किलो गोबर खरीद कर 6.13 लाख 13 हजार 404 रुपये, खैरागढ़ ब्लॉक में 341558 किलो गोबर खरीद कर 6 .83 लाख रुपये, छुईखदान ब्लॉक में 323524 किलो गोबर खरीद कर 6.47 लाख, चौकी ब्लॉक में 805596 किलो गोबर खरीद कर 16.11 लाख मोहला ब्लॉक में 445488 किलो गोबर खरीद कर 8.90 लाख तथा मानपुर ब्लॉक में 203775 किलो गोबर खरीद कर 4 लाख 07 हजार 550 रुपये का भुगतान किया गया।

0 शहर में खूब बेचा जा रहा गोबर

ऐसा नहीं कि ग्रामीण क्षेत्रों में ही गोबर बेचा जा रहा है। शहरी इलाकों में भी किसान व पशुपालक जमकर गोबर बेचने पहुंच रहे हैं। राजनांदगांव शहरी क्षेत्र में 679336 किलो गोबर बेचकर 13 लाख 58 हजार 672 रुपये कमाए गए। गंडई नगर में 71495 किलो गोबर बिका। छुईखदान नगर में 16084 किलो गोबर बेचकर किसानों ने महज 15 दिनों में 32 हजार 168 रुपये की कमाई की। खैरागढ़ नगर में तो गोबर से 3.24 लाख कमाए गए। डोंगरगढ़ नगर में 126675 किलो गोबर बेचकर किसानों व पशुपालकों ने दो लाख 53 हजार 350 रुपये बटोरे।

अब खाद बना रहे

गोधन योजना के माध्यम से जिले की महिलाएं स्वावलंबन की तरफ तेजी से बढ़ रहीं हैं। खरीदे गए गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाने का काम किया जा रहा है। खेती-बाड़ी के साथ ही इस खाद का उपयोग सरकारी नर्सरियों में भी किया जा रहा है।

टोपेश्वर वर्मा, कलेक्टर

दूसरों को भी प्रेरित कर रहीं

हम शुरू से पारंपरिक खेती की तरफ सबका ध्यान खींच रहे हैं। गोबर से बनने वाली खाद से सब्जी बाड़ी व अन्य तरह की खेती को वापस रासायनिक खाद से मुक्ति मिल सकती है। समूह की महिलाएं इसके माध्यम से दूसरों को भी प्रेरित कर रहीं हैं।

फुलबासन यादव, मार्गदर्शक, मां बम्लेश्वरी स्व-सहायता समूह